राहुल गांधी के विरुद्ध एमपी एमएलए कोर्ट मे परिवाद दायर

बरी हुए तीन लोगों को बताया गया था आरोपी

by TheUnmuteHindi
राहुल गांधी के विरुद्ध एमपी एमएलए कोर्ट मे परिवाद दायर

राहुल गांधी के विरुद्ध एमपी एमएलए कोर्ट मे परिवाद दायर
बरी हुए तीन लोगों को बताया गया था आरोपी
नई दिल्ली, 25 जनवरी : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाथरस में गत 12 दिसंबर को मृत युवती के परिजनों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने एक्स पर परिवार के साथ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसमें कहां था कि पीडि़त परिवार घर में कैद है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। अब ताजा मामले में उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एमपी एमएलए कोर्ट में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विरुद्ध परिवाद दायर किया गया है। जानकारी के अनुसार राहुल गांधी द्वारा कोर्ट से बरी तीन लोगों को आरोपी बताया गया था। आपको बता दे 12 दिसंबर को राहुल गांधी चंदपा कोतवाली क्षेत्र के गांव बूलगढी़ आए थे। इस गांव में सितंबर 2020 में एक युवती से दरिंदगी हुई थी और दिल्ली के अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। यह मामला न्यायालय में चला था और न्यायालय ने इस मामले को गैंग रेप का मामला नहीं माना था। न्यायालय ने इस मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया था और एक आरोपी संदीप को गैरइरादतन हत्या का दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 12 दिसंबर को मृत युवती के परिजनों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने एक्स पर परिवार के साथ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसमें कहां था कि पीडि़त परिवार घर में कैद है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। इसको लेकर बचाव पक्ष की अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने राहुल गांधी को 50- 50 लाख रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा था और 15 दिन का समय भी दिया था। 15 दिन की अवधि बीत जाने के बाद भी राहुल गांधी ने जब इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया।
सुनवाई हेतु 10 फरवरी की तिथि की गई है नियत
अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने रामकुमार उर्फ रामू पुत्र राकेश निवासी बूलगढी़ थाना चंदपा की ओर से एमपी/एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर किया है। न्यायालय ने इस दायर परिवाद में सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तिथि नियत की है। इसमें कहा गया है कि परिवादी का विधिक नोटिस अभियुक्त पर सम्यक रूप से तामील हुआ परन्तु प्रतिकर राशि की अदायगी तो क्या अभियुक्त ने नोटिस प्राप्ति के वाबजूद भी नोटिस में दी गयी अवधि में उत्तर देना भी उचित एवं आवश्यक नहीं समझा।

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