कोटा,20 मार्च 2025: देश का कोचिंग हब कहा जाने वाला कोटा अब दबाव में है। इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग लेने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से गिरावट आती जा रही है । यह बदलाव न केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि कोटा की सड़कों, हॉस्टल और स्थानीय व्यवसायों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में कोटा में 1.75 लाख छात्रों ने NEET और JEE की तैयारी की है। वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर करीब 1.22 लाख रह गई है। पहले जहां 85% से 100% तक हॉस्टल भरे रहते थे पर अब यह संख्या घटकर 40% से 60% रह गई है। हॉस्टल और मेस मालिकों कीकमाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
आत्महत्याओं के बढ़ते मामले
छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों ने कोटा की कोचिंग अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ा दिया है। 2023 में, कोटा में 27 छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि 2024 में यह संख्या 16 रही। इस साल अब तक 6 छात्रों ने अपनी जान दी है।
स्थानीय व्यवसायों पर भी असर पड़ा है। फल और जूस बेचने वाले जैसे छोटे कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है। पहले जहां एक फल बेचने वाला रोजाना 10,000 रुपये कमाता था अब उसकी कमाई घटकर केवल 2,000 रुपये रह गई है।
बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के कई छात्रों ने कोटा आने की बजाय अपने गृह राज्य में कोचिंग को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही देश के अन्य हिस्सों में बढ़ती कोचिंग संस्थाओं की संख्या ने भी कोटा की लोकप्रियता को कम कर दिया है।
कोटा में हो रही इस गिरावट ने न केवल शहर की अर्थव्यवस्था बल्कि शिक्षा प्रणाली को भी चुनौती दी है। अब सवाल यह है कि कोटा अपनी खोई हुई पहचान वापस कैसे पाएगा।
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