लखनऊ , 29 जनवरी 2025: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने प्रयागराज के महाकुंभ मेला में मची भगदड़ की कड़ी निंदा की है, जिसमें रिपोर्ट्स के अनुसार 15 लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस आयोजन के लिए किए गए “विश्व स्तरीय व्यवस्था” के झूठे दावों की असलियत अब सामने आ गई है और इस त्रासदी के लिए जिम्मेदारी लेने वाले लोगों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “अब जब ‘विश्व स्तरीय व्यवस्था’ के दावों के पीछे की असलियत सामने आ गई है, तो जो लोग ये झूठे दावे कर रहे थे, उन्हें इस घटना में मारे गए लोगों की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि इस घटना के बाद श्रद्धालुओं और संत समुदाय के बीच विश्वास फिर से स्थापित करने के लिए महाकुंभ मेले का प्रबंधन उत्तर प्रदेश सरकार के बजाय भारतीय सेना को सौंपा जाना चाहिए। उनका कहना था कि मेले के संचालन में राज्य सरकार के रवैये से लोगों का विश्वास टूट चुका है, और सेना के अधीन मेले का संचालन ही बेहतर रहेगा।
इससे पहले, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने उत्तर प्रदेश सरकार से घायलों की मदद करने और भविष्य में किसी भी अन्य दुर्घटना से बचने के लिए त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया। महाकुंभ मेले में भगदड़ की स्थिति मौनी अमावस्या के दिन बनी, जब हजारों श्रद्धालु गंगा में पवित्र स्नान करने के लिए एकत्र हुए थे। यह दिन महाकुंभ के सबसे महत्वपूर्ण और शुभ दिनों में से एक है, और इस दिन स्नान के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी।
राहत बचाव कार्य मे जुटी टीमे
भगदड़ के कारण घटनास्थल पर एंबुलेंस पहुंची और घायल श्रद्धालुओं को इलाज के लिए मेला परिसर के भीतर स्थित केंद्रीय अस्पताल में ले जाया गया। इस घटना से जुड़े अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए, लेकिन भारी भीड़ और अपर्याप्त व्यवस्था के कारण यह त्रासदी घटी।
यह घटना महाकुंभ के आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कमी को लेकर सवाल खड़ा करती है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का यह बयान इस घटना के बाद आई प्रतिक्रिया का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
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