पंजाबी यूनिवर्सिटी में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष व साजिबजादों की शहादत को समर्पित सात दिवसीय वर्कशाप शुरू
पटियाला : पंजाबी यूनिवर्सिटी में पंजाबी विभाग की साहित्य सभा की तरफ से करवाई जा रही श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष और साहिबजादों की शहादत को समर्पित सात दिवसीय वर्कशाप शुरू हो गई है। शहादतों संबंधी विचार व उचार केसे करें ? (स्थापितज्ञान प्रबंध की सीमाओं के आर पार) विषय पर करवाई जा रही इस वर्कशाप के उद्घाटनी सैशन दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार प्रो. मनजीत ङ्क्षसह मुख्यातिथि के तौर पर पहुंचे तथा प्रसिद्ध सिख इहिासकार व प्रचारक डॉ. सुखदीप ङ्क्षसह उदोके द्वारा मुख्य सुर भाषण दिया गया। उद्घाटनी सैशन की प्रधानगी डीन अकादमिक मामले प्रो. नरिंदर कौर मुल्तानी ने की।
सिंह साहिब प्रो. मनजीत सिंह ने कहा कि शरीरों के इतिहास लिखने तो आसान हैं परन्तु रूहों की इतिहासकारी हर कोई नहीं कर सकता। डा. सुखदीप सिंह उद्दोके की तरफ से अपने मुख्य- सुर भाषण दौरान अलग- अलग ऐतिहासिक ग्रंथों के हवाले के साथ सिख विरासत में से शहादत की अलग- अलग मिसालें पेश की गई। उन्होंने कहा कि सिख इतिहास शहादतों के ऐसे महान किस्सों के साथ भरा पड़ा है, जिनकी बराबरी संसार में अन्य कहीं भी नहीं।
डीन अकादमिक मामले प्रो. नरिन्दर कौर मुल्तानी ने भावपूरत शब्दों के साथ वर्कशाप के उद्घाटनी शब्द पेश किये। उन्होंने अपने गुजरात में बीते बचपन के हवाले के साथ बहुत सी यादें सांझा करते बताया कि कैसे गुरबानी ने उन को मानसिक ताकत प्रदान की। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी कमाई में से दसवंध निकालने वाली गुरमति की शिक्षा पर अमल कर लें तो समाज की बेहतरी के लिए बेहतर योगदान डाल सकते हैं।
पंजाबी यूनिवर्सिटी में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष व साजिबजादों की शहादत को समर्पित सात दिवसीय वर्कशाप शुरू
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