लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नवंबर से मिड-डे मील के अलावा सप्ताह में एक दिन हलवा या उपमा भी दिया जाएगा। राज्य सरकार ने बच्चों के पोषण में सुधार और स्कूलों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से यह अतिरिक्त व्यवस्था शुरू करने की तैयारी की है। यह कार्यक्रम नवंबर 2026 से फरवरी 2027 तक चलेगा और कुल 14 सप्ताह तक लागू रहेगा।
किस दिन मिलेगा हलवा और किस दिन उपमा?
सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार, बच्चों को शुक्रवार को अतिरिक्त भोजन दिया जाएगा। महीने के पहले और तीसरे शुक्रवार को हलवा, जबकि दूसरे और चौथे शुक्रवार को उपमा परोसा जाएगा।
यदि शुक्रवार को स्कूल में छुट्टी होती है, तो यह भोजन अगले कार्यदिवस पर दिया जाएगा। बच्चों को यह अतिरिक्त भोजन स्कूल के मध्यावकाश में मिलेगा। यह नियमित मिड-डे मील की जगह नहीं लेगा, बल्कि उसके अतिरिक्त दिया जाएगा।
हलवा और उपमा बनाने के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक बच्चे को मिलने वाले भोजन में कम से कम 30 ग्राम सूजी का इस्तेमाल किया जाएगा।
हलवा बनाने के लिए सूजी, घी, चीनी और कद्दूकस किए हुए नारियल का उपयोग किया जाएगा। वहीं, उपमा में सूजी के साथ मौसमी सब्जियां, मूंगफली और मसाले शामिल होंगे।
स्कूलों को सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई का ध्यान रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया पर निगरानी रखने को कहा गया है। दिशानिर्देशों में FSSAI प्रमाणन वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल की भी सिफारिश की गई है।
स्कूलों को रखना होगा वितरण का रिकॉर्ड
इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों को यह रिकॉर्ड रखना होगा कि कितने बच्चों को भोजन दिया गया और कितनी सामग्री इस्तेमाल हुई। इसके लिए लाभार्थियों की सूची, स्टॉक रजिस्टर और वितरण से जुड़ी तस्वीरें रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ अतिरिक्त भोजन देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि तय कार्यक्रम के अनुसार बच्चों तक भोजन पहुंचे और उसकी गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके।
बच्चों को कितना फायदा होगा?
स्कूलों में नियमित भोजन के साथ अतिरिक्त खाद्य विकल्प मिलने से बच्चों को कुछ अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण मिल सकता है। हालांकि, केवल हलवा या उपमा देने से बच्चों की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो जातीं। इसके लिए भोजन में प्रोटीन, फल, सब्जियां और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन भी महत्वपूर्ण है।
इस कार्यक्रम का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्कूलों में भोजन नियमित रूप से दिया जाता है या नहीं, उसकी गुणवत्ता कैसी रहती है और बच्चों को पर्याप्त मात्रा मिलती है या नहीं।
नवंबर से फरवरी तक चलेगा कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए चल रही भोजन व्यवस्था में एक अतिरिक्त बदलाव है। नवंबर से शुरू होने वाले कार्यक्रम के दौरान स्कूलों को निर्धारित मेन्यू और वितरण संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि योजना कितने स्कूलों में समय पर लागू होती है और बच्चों को इसका कितना लाभ मिलता है।
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