चंडीगढ़, 26 अगस्त 2026: पंजाब सरकार में सांस्कृतिक मामलों और पर्यटन विभाग के सलाहकार दीपक बाली ने कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि गांधी की टिप्पणियों ने पंजाबियों और राज्य भर के विभिन्न धर्मों के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।
बाली ने कहा कि पंजाब पांच नदियों की धरती है और हमेशा से अपनी समृद्ध विविधता के लिए जाना जाता रहा है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और एक-दूसरे की मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की संस्कृति आपसी भाईचारे और धार्मिक सद्भाव में रची-बसी है, और किसी को भी करोड़ों लोगों की आस्था और धार्मिक भावनाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
पंजाब सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों को गांधी द्वारा “धार्मिक आडंबर” (religious pomp) कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए बाली ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम पंजाब की महान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान में और धार्मिक हस्तियों के महान विचारों और शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ इसलिए मनाई गई क्योंकि उनका अद्वितीय बलिदान आज भी वर्तमान पीढ़ी को साहस, सच्चाई और दूसरों के अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित करता है।
इसी तरह, उन्होंने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज जी का 650वां प्रकाश पर्व जुलूसों, ड्रोन शो, गांवों में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग और कीर्तन समारोहों के माध्यम से मनाया जा रहा है। बाली ने कहा, “इन सभी कार्यक्रमों को ‘आडंबर’ कहना न केवल सरकार की आलोचना है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की भावनाओं को आहत करना भी है।”
बाली ने सनातन परंपराओं को समर्पित कार्यक्रमों, जैसे ‘एक शाम भगवान शिव के नाम’ और ‘हमारे राम’, का भी बचाव किया और कहा कि हजारों लोग पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ इन कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर समुदाय की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करती है और पंजाब की विभिन्न आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं का जश्न मनाने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी।
‘हमारे राम’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए बाली ने कहा कि यह रामायण की एक प्रस्तुति है जो इसके विभिन्न अध्यायों को दर्शाती है और माता-पिता का सम्मान करने और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने जैसे महत्वपूर्ण मूल्यों का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों पर सवाल उठाना या यह सुझाव देना कि मंदिर नहीं बनाए जाने चाहिए, करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने के बराबर है।
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