गन्नौर, 28 जुलाई 2025: हरियाणा के सोनीपत जिले के पुरखास राठी गांव के 20 साल के जतिन ने कांवड़ यात्रा में 51 लीटर गंगाजल लेकर हरिद्वार से अपने गांव तक का सफर पूरा किया। अपनी श्रद्धा की इस यात्रा में उसने अपनी जान गंवा दी।
भारी कांवड़ के बोझ से उसकी मांसपेशियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, फिर भी उसने हार नहीं मानी और यात्रा पूरी की। दर्द से राहत पाने के लिए वह रास्ते में शिविरों से पेनकिलर लेता रहा, लेकिन समय पर उचित इलाज न मिलने और लगातार दवाइयों के दुष्प्रभाव से उसके लिवर और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। आखिरकार, शुक्रवार रात जतिन इस दुनिया को अलविदा कह गया।
जतिन के चाचा राजेश राठी ने बताया कि यूपी के शामली के पास उसकी मांसपेशी फट गई थी। परिवार ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन जतिन ने इसे हल्की चोट समझकर पेनकिलर लिया और आगे बढ़ता रहा। 22 जुलाई को वह शेखपुरा शिविर में रुका, जहां उसके चाचा रातभर उसके साथ रहे। अगले दिन जतिन ने शिव मंदिर में गंगाजल चढ़ाया और घर पहुंचा। इस दौरान उसने खाना-पीना भी बहुत कम कर दिया था, जिसने उसकी हालत को और बिगाड़ दिया।
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