नई दिल्ली, 9 जुलाई 2025: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 9 जुलाई को अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘सहकार-संवाद’ कार्यक्रम में गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सहकारी समितियों से जुड़ीं महिलाओं और कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने रिटायरमेंट प्लान का खुलासा करते हुए कहा कि वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने के बाद अपना समय वेदों, उपनिषदों के अध्ययन और प्राकृतिक खेती को समर्पित करेंगे।
अमित शाह ने प्राकृतिक खेती को एक वैज्ञानिक और लाभकारी प्रयोग बताया, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि कृषि उत्पादकता में भी डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी लाता है। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों से उगाए गए गेहूं से कैंसर, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं, जबकि प्राकृतिक खेती से दवाइयों की जरूरत कम होती है। शाह ने यह भी साझा किया कि वह अपनी जमीन पर पहले से ही प्राकृतिक खेती करते हैं, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
‘सहकार-संवाद’ में शाह ने बनासकांठा का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी वहां पानी की भारी कमी थी, जहां लोग हफ्ते में एक बार नहाने के लिए भी पानी के लिए तरसते थे। आज, सहकारी डेयरी मॉडल के जरिए वहां एक परिवार दूध उत्पादन से सालाना एक करोड़ रुपये तक कमा रहा है। उन्होंने सहकारिता मंत्रालय को गृह मंत्रालय से भी बड़ा विभाग बताया, क्योंकि यह किसानों, गरीबों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है।
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