इस्लामाबाद, 30 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदुओं के नरसंहार के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध खराब हो गए हैं। इस बीच, भारत सरकार ने सेना को कार्रवाई की इजाजत दे दी है। उस समय भारत की ओर से पाकिस्तान पर हमले का खतरा बढ़ गया है। भारत के आक्रामक रुख से घबराए पाकिस्तान ने अब चीन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। और चीन भी पाकिस्तान की खूब मदद कर रहा है। पाक चीनी उपग्रहों का उपयोग कर रहा है।
चीन की मदद से भारतीय सैन्य पर नजर
पाकिस्तान को साइबर से लेकर समुद्री तक हर तरह से भारत से हमले का खतरा है। फिर चीन भी इसे पूरा समर्थन दे रहा है। पाकिस्तान भारत पर नज़र रखने और सैन्य संचार को मजबूत करने के लिए चीनी उपग्रहों का उपयोग कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये चीनी उपग्रह भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने और पाकिस्तान की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
पाक कर रहा चीन के इन उपग्रहों का उपयोग
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान और चीन के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं। इसे सदाबहार दोस्ती कहा जाता है। पाकिस्तान के पास स्वयं उपग्रह प्रक्षेपित करने की क्षमता नहीं है, इसलिए वह चीन पर निर्भर है। पाकिस्तान इस उपग्रह का उपयोग भारत की सीमाओं और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कर रहा है।
पाकिस्तान चीन द्वारा प्रक्षेपित PRSS-1 (2018) और PRSC-EO1 (2025) जैसे उपग्रहों का उपयोग कर रहा है। ये सुदूर संवेदन उपग्रह दिन और रात दोनों समय निरीक्षण करने में सक्षम हैं। यह बादल वाले मौसम में भी काम करता है। रिपोर्ट के अनुसार इसका इस्तेमाल भारत की सीमाओं और सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा, PAKSAT MM1 (2024) जैसे संचार उपग्रह पाकिस्तान के सैन्य संचार को सुव्यवस्थित करने में मदद करते हैं।
भारत अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल
भारत अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। भारत के पास 43 से अधिक सक्रिय उपग्रह हैं, जिनमें से कुछ का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। जैसे रडार इमेजिंग सैटेलाइट (आरआईसैट) जो सभी मौसम स्थितियों पर नजर रख सकता है। भारत ने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक में इस उपग्रह का इस्तेमाल किया था।