पटियाला, 17 मार्च : जन्म तो हर कोई लेता है और मौत भी सभी की निश्चित है। जिंदगी और मौत के दौरान जो समय शक्तियां हालत एवं अवसर परमात्मा हमें देता है । वह अनमोल तोहफे होते हैं। इस सुनहरे समय के दौरान अगर हमें ठीक अगवाई सहायता, सहारा एवं साथी गुरु अध्यापक मिल जाए तो अखबार बेचने वाले रेलवे स्टेशन पर सरकारी लाइट में आराम से बैठ के रात को 7 से 10 बजे तक पढ़ने वाले अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति और दुनिया के मिसाइल मैन बन सकते हैं। हमारे सोनी पब्लिक स्कूल पटियाला में एक समागम के दौरान मुझे भारत रत्न डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम साहब के बारे में बोलने का अवसर प्राप्त हुआ मुझे विश्वास नहीं हुआ कि किसी गरीब मछुआरे एवं किश्ती चलाने वाले का बेटा इतना महान बन सकता है बचपन में कलाम साहब ने हवाई जहाज उड़ते देखा और फैसला किया कि वह पायलट बनेंगे। पिता ने जवाब दे दिया परंतु अध्यापक गुरु ने हौसला अफजाई की । दसवीं कक्षा पास करने के उपरांत उन्होंने एनडीए देहरादून से नौकरी के लिए अर्जी भेजी उनको वहां जाने के लिए उनकी बहन ने अपने गहने बेच के पैसे दिए। वहां वह असफल हो गए। उनके हौसले परास्त हो गए और ऋषिकेश के समीप उन्हें स्वामी सदानंद जी मिले उन्होंने उनके माथे और हाथों को देख के हौसला अफजाई की। के परमात्मा ने उनको पायलट नहीं इस मुकाम से ऊपर लेकर जाना है।
डॉक्टर कलाम साहब को साइंस विज्ञान एवं हिसाब की पढ़ाई में सर्वोत्तम नंबर लेने के कारण। उनके प्रिय अध्यापक श्री शिव सुब्रमण्यम अय्यर की तरफ से सर्वोत्तम सहयोग दिया गया। वह सुबह कलाम जी को सेवर 4:00 बजे अपने घर बुलाकर पढ़ाया करते थे जिस कारण कलाम जी को स्कॉलरशिप मिलती थी उन्होंने बैंगलोर मद्रास एवं गुजरात से विज्ञान की पढ़ाई की। 1963 में वह हवाई जहाज से अमेरिका नासा गए। नासा के चाहते थे कि कलाम साहब नासा में ही रह के अपने सपनों को साकार करें। जिस हिट नासा की तरफ से उनको अच्छी स्कॉलरशिप देने का ऐलान किया गया पर अपने देश समाज के प्रति वफादारी प्रेम धन्यवाद एवं अपने देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए वह अमेरिका की धन दौलत शोहरत सहुलते छोड़कर भारत वापस आ गए। अपने दिल दिमाग भावनाओं विचारों में मिसाइल टेक्नोलॉजी भी लेकर आए। उन्होंने सख्त मेहनत करके मिसाइल बनाई जिसके चलते भारत को अमेरिका रूस चीन इजरायल कोरिया आदि के बराबर कर दिया। वह भारत के राष्ट्रपति भी रहे जब उन्होंने राष्ट्रपति की तरफ से कम उठाई थी तो उन्होंने अपने अध्यापकों को भी राष्ट्रपति भवन बुलाया था और कसम उठाने से पहलेउन्होंने अपने अध्यापकों माता-पिता के चरणों में सिर रखकर आशीर्वाद प्राप्त किया और धन्यवाद किया। वह हर रोज अंतरराष्ट्रीय स्तर से वैज्ञानिकों, नोबेल पुरस्कार विजेता विद्वानों की तीन नई किताबें पढ़ते थे। उनकी तरफ से हमेशा एक नियम अनुशासन के चलते गतिविधियां चलाई जाती थी उनके पास 36000 किताबें 5 जोड़ी कपड़े ही थे। वह अपनी पेंशन का 50% हिस्सा अपने राज के स्कूलों को अपने फर्ज जिम्मेवारी की तरफ से प्रदान करते थे। उनके विचार भावनाएं और विश्वास था कि देश को खुशहाल सुरक्षित सेहतमंद और उन्नत कर करने के लिए अच्छे संस्कार मर्यादाएं फर्ज जिम्मेवारियां सहनशीलता विनम्रता सबर शांति सख्त मेहनत मुफ्त की सहुलते रहित वाली शिक्षा प्रणाली की जरूरत है।
27 जुलाई 2015 को जब डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम साहब शिलांग के कॉलेज में विद्यार्थियों अध्यापकों को विज्ञान मिसाइल टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दे रहे थे तब अचानक उनका ब्लड प्रेशर शुगर घटना के कारण दिल का दौरा पड़ गया और वह बेहोश होकर गिर गए पर वहां हजार सेकंड विद्यार्थी अध्यापक में से किसी ने भी कलाम साहब को फर्स्ट एड सीपीआर नहीं दिया । अगर सीपीआर दिया जाता तो वह मरने से बच सकते थे जबकि अस्पताल पहुंचने से डॉक्टर 22 मिनट तक कलाम साहब जी को सीपीआर करते रहे । मुझे खुशी है कि हमारे स्कूल में श्री काकाराम वर्मा जी हमें एवं विद्यार्थियों को फर्स्ट एड सीपीआर फायर सेफ्टी आफत प्रबंध नसों अपराधों संबंधित ट्रेनिंग देते रहते हैं हमें छोटे-छोटे बच्चे जो तीसरी से आठवीं कक्षा में है फर्स्ट एड सीपीआर फायर सेफ्टी मुकाबले में मेडल भी जीते हैं। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से डॉक्टर कलाम साहब का जन्म दिवस 15 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम विद्यार्थी की तरफ से हर साल मनाया जाता है। हम भी कोशिश करें कि कलाम साहब की तरह सख्त मेहनत करके ज्यादा से ज्यादा अच्छी किताबें पढ़ के अपने विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करें। अपने देश की खुशहाली उन्नति सुरक्षा सम्मानित सख्त मेहनत करके अच्छे इंसान एवं वैज्ञानिक बन जाएं ।
रमनदीप कौर प्रिंसिपल, सोनी पब्लिक स्कूल,एकता नगर,फोकल प्वाइंट, पटियाला।
9878611620