यूपी के स्पोर्ट्स कॉलेजों के शिक्षक सरकारी कर्मचारी नहीं, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

by Priya

लखनऊ, 29 अक्टूबर 2026। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के स्पोर्ट्स कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश स्पोर्ट्स कॉलेजेज सोसाइटी के तहत संचालित संस्थानों के शिक्षक सरकारी कर्मचारी नहीं माने जा सकते। इसलिए वे वेतन निर्धारण और पेंशन से जुड़े विवादों के लिए राज्य लोक सेवा अधिकरण का रुख नहीं कर सकते।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ के प्रधानाचार्य की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया। अदालत ने राज्य लोक सेवा अधिकरण के 4 सितंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया और शिक्षक हरवीर सिंह की ओर से दाखिल क्लेम पिटीशन की कार्यवाही भी निरस्त कर दी।

क्या था पूरा मामला?

हरवीर सिंह की नियुक्ति वर्ष 1994 में सहायक शिक्षक (फुटबॉल) के पद पर हुई थी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पुनर्गठन के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में रहने का विकल्प चुना और अगस्त 2001 में लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज में कार्यभार संभाला। वह 30 अप्रैल 2023 को सेवानिवृत्त हुए।

सेवानिवृत्ति से पहले उनके वेतन निर्धारण में विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद वेतन दोबारा निर्धारित किया गया और कथित रूप से अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली के आदेश दिए गए। हरवीर सिंह ने इन आदेशों को राज्य लोक सेवा अधिकरण में चुनौती दी थी।

सरकार से अनुदान मिलने का मतलब सरकारी कर्मचारी होना नहीं

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश स्पोर्ट्स कॉलेजेज सोसाइटी, सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है। इसका प्रबंधन सोसाइटी का शासी निकाय करता है और शिक्षकों की नियुक्ति भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार से वेतन और अन्य खर्चों के लिए वित्तीय अनुदान मिलने मात्र से सोसाइटी के शिक्षक सरकारी कर्मचारी नहीं बन जाते।

दूसरे कानूनी मंच पर जाने की छूट

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षक अपने वेतन निर्धारण और वसूली से जुड़े आदेशों को उचित कानूनी मंच पर चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं। यानी अदालत ने उनकी शिकायतों के समाधान का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है, बल्कि संबंधित विवाद के लिए सही कानूनी मंच निर्धारित किया है।

इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश स्पोर्ट्स कॉलेजेज सोसाइटी के अधीन आने वाले संस्थानों के शिक्षकों के सेवा संबंधी विवादों पर पड़ सकता है।

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