US deportee from Punjab Jasnoor Singh Story: 19 वर्षीय जसनूर सिंह, जो नवां कोट गांव, पंजाब के निवासी हैं, ने अपनी यात्रा के दौरान जो अनुभव किए, वे न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण थे, बल्कि यह उनकी उम्मीदों और सपनों की एक कड़वी कहानी भी है। जसनूर ने अमेरिका में अपने सपनों को पूरा करने के लिए एक लंबा और कठिन रास्ता तय किया, जो अंत में असफल रहा, लेकिन यह संघर्ष और संघर्षशीलता के कई पहलुओं को उजागर करता है।
Jasnoor Singh: हिरासत और धार्मिक उत्पीड़न
रविवार रात को, जसनूर (Jasnoor Singh) को मैक्सिको सीमा से लॉस एंजिल्स जाते समय अमेरिकी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। सैन डिएगो हिरासत केंद्र में रहकर उन्होंने जो अनुभव किए, वो धार्मिक उत्पीड़न और अपमानजनक व्यवहार का हिस्सा थे। जसनूर ने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें उनकी पगड़ी, कड़ा और अन्य धार्मिक प्रतीकों को उतारने के लिए कहा, जिससे उनके धार्मिक विश्वासों की अनदेखी की गई। उन्होंने इस घटना को याद करते हुए कहा, “उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस धर्म से ताल्लुक रखते हैं।”
यात्रा की कठिनाइयाँ और वित्तीय नुकसान
जसनूर की यात्रा अपने आप में एक कठिन संघर्ष था, जिसमें उन्होंने कई देशों की यात्रा की, जैसे कि घाना, सूरीनाम, गुयाना, ब्राज़ील, पेरू, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ और मैक्सिको। इन देशों में, जसनूर ने एक एजेंट के माध्यम से यात्रा की योजना बनाई थी और 55 लाख रुपये का भुगतान किया था। हालांकि, उनके एजेंट ने उड़ानों की व्यवस्था का आश्वासन दिया था, जो पूरी नहीं हो पाई। इसके बावजूद, जसनूर ने अपने अमेरिकी सपने को पूरा करने के लिए यह लंबी यात्रा की।
कभी न हार मानने की भावना
अमेरिका की सीमा पार करने के बाद, जसनूर को हिरासत में ले लिया गया और अंततः भारत भेज दिया गया। लेकिन इस सब के बावजूद, वह विचलित नहीं हुए। जसनूर का मानना है कि भारत में उनके लिए कोई अवसर नहीं है, और उन्होंने 50 लाख रुपये का निवेश करने के बावजूद भारत में कोई ठोस सफलता नहीं हासिल की। उनका दृढ़ विश्वास है कि उनके मामा और रिश्तेदार अमेरिका में अच्छे से बसे हुए हैं और बेहतर जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा, “कठिन समय हमें अपने परिवार को और भी अधिक याद दिलाता है,” और यह भावना उनके संघर्ष की गहरी झलक पेश करती है।
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