माला पापलकर की प्रेरणादायक यात्रा: कूड़ेदान से कलेक्टर कार्यालय तक

by chahat sikri
माला पापलकर की प्रेरणादायक यात्रा

महाराष्ट्र, 22 अप्रैल 2025: पच्चीस साल पहले महाराष्ट्र के जलगांव रेलवे स्टेशन पर एक दृष्टिहीन नवजात माला को कूड़ेदान में लावारिस हालत में पाया गया था। उसे बचाया गया और अमरावती के परतवाड़ा में अंधे और बहरे बच्चों के पुनर्वास केंद्र में पाला गया था। यहीं पर उसके अभिभावक पद्मश्री पुरस्कार विजेता शंकरबाबा पापलकर ने उसका नाम माला पापलकर रखा था।

माला ने पूरी लगन से अपनी शिक्षा जारी रखी

उनके मार्गदर्शन में माला ने ब्रेल लिपि सीखी और पूरी लगन से अपनी शिक्षा जारी रखी थी। उसने 2018 में अमरावती विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और बाद में सरकारी विदर्भ विज्ञान और मानविकी संस्थान से मास्टर डिग्री हासिल की थी। ​​कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद माला ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) क्लर्क ‘ग्रुप सी’ मुख्य परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है।

अब 26 वर्षीय माला नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद राजस्व सहायक के रूप में नागपुर में कलेक्टर कार्यालय में शामिल होने के लिए तैयार है।

मैं सभी को बहुत याद करूंगी खासकर शंकर बाबा को उन्होंने रिपोर्ट मे बताया की मैं आश्रम छोड़ने और नागपुर में अकेले रहने को लेकर थोड़ा घबराई हुई हूँ। मैं पहले भी हॉस्टल में अकेले रह चुकी हूँ।  लेकिन इस बार यह अलग लग रहा है।

आगे की ओर देखते हुए माला आईएएस अधिकारी बनने के सपने के साथ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करना चाहती हैं।

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