रंगकर्मियों का मेला सम्पन्न हुआ सतीश कुमार वर्मा खोज परिवार का स्थापना समारोह
– दिल्ली के 80 के करीब रंगर्मियों ने लिया हिस्सा
पटियाला : सतीश कुमार वर्मा खोज परिवार की तरफ से इकबाल इन्न होटल पटियाला में मनाया छठा स्थापना समारोह उस समय रंगकर्मियों का मेला सम्पन्न हुआ,ा जब पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के 80 के करीब रंगकर्मी एक दूसरे को आनंदमई अहसासों के साथ मिले। इस प्रोग्राम में एक तरफ डा. कमलेश उपल्ल, जगजीत सरीन, हरजीत कैंथ और कृपाल कजाक के रूप में पंजाबी नाटक और रंगमंच की तीसरी और चौथी पीढ़ी के प्रौढ़ रंगकर्मी शामिल हुए और दूसरी तरफ चकरेश, दिलजीत सोना, रंग हरजिन्दर, मोही अमरजीत, प्रकट घुमाण, तजिन्दर बाज और गुरनैब जैसे पांचवी पीढ़ी के रंगकर्मियों की शिरकत और इस स्थापना समारोह को पीढिय़ों के मेल के रूप में यादगार बना दिया।
इस मौके डा. गुरसेवक लंबी द्वारा सभी रंगकर्मियोंं और खोजियों का स्वागत करने के बाद कनवीनर डा. कुलदीप सिंह दीप ने मेले के शुरू हो चुके और शुरू होने वाले अहम फीचरों रंगपीठ, पर्दा ए स्करीन, नाटक- मंच अध्ययन केंद्र, छिमाही दुभाषी जनरल, बाल रंगमंच उत्सव, रंग संवाद आदि बारे जानकारी सांझी की। इस उपरांत पंजाबी में नाटक और रंगमंच के सिद्धांत और व्यवहार ऊपर दशकों बद्धी खोज कार्य करने वाली बड़ी शख्सियत कमलेश उप्पल का इक्कीस हजार रुपए, शाल और यादगारी चिह्न के साथ सम्मान किया। डा. नवदीप कौर ने उनकी नाटक और रंगमंच देन पर भरपूर प्रकाश पाया। प्रसिद्ध नाटककार, निर्देशक और रंगकर्मी डा. साहिब सिंह ने रंगपीठ के भविष्य चिह्नों की बात करते सुझाव दिया कि अब रंगपीठ में ग्रामीण, शहरी रंगमंच के संकल्पों की पुनर व्याख्या, रंगकर्मी की राजसी चेतना, नए पुराने निर्देशकों के अनुभव और प्रस्तुतीकरण की आलोचना की पड़चोल की जाए। दिल्ली के पंजाबी रंगमंच के अहम हस्ताक्षर रवि तनेजा ने थिएटर की आर्थिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि दिल्ली में इस समय पर रंगमंच के लिए भारी आर्थिक संकट है। उन्होंने कहा कि पंजाबी नाटक को भारत के दूसरे राज्यों में अपनी पहचान मजबूत करनी चाहिए।
बुजुर्ग रंगकर्मी जगजीत सरीन ने कहा कि रंगपीठ ने नाटक-मंच के रुके पानियों में हलचल पैदा की है और अब हर महीने किसी नए विषय पर भरपूर जानकारी का इन्तजार रहता है। कृपाल कजाक ने कहा कि बाल रंगमंच उत्सव करवाना खोज परिवार का बहुत महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला कार्य रहा है। इस के अलावा इस परिवार द्वारा संवाद का जो सिलसिला शुरू किया है, वह विलक्षण और मूल्यवान है। दूसरे भाग में डा. कुलदीप सिंह दीप की पुस्तक ‘2023 का पंजाबी नाटक- मंच’, सतीश कुमार वर्मा की दो पुस्तकें ‘पंजाबी के प्रतिनिधि लघु नाटक’ और ‘सिमरतियों को सिमरते’ और सतनाम मूधल की मैगजीन ‘रंगकर्मी’ लोग अर्पित किया। साबाश फीचर के रूप में नौजवान आर्ट फोटोग्राफर सुखजीवन और हरियाणा के नौजवान नाटककार कुलविन्दर पद्म का सम्मान किया। सत्कार फीचर के अंतर्गत प्रसिद्ध सीने अदाकार हरजीत कैंथ और डा. बंसबीर कौर का सम्मान किया। शुकराना फीचर के अंतर्गत डिजाइनर प्रीतइन्दर सिंह और इकबाल इन्न के मैनेजर डी.एस बसेरा बसेरा का सम्मान किया। इस समारोह में पटियाला से डा. परमजीत वर्मा, डा. दलीप सिंह उप्पल, डा. भीमइन्दर सिंह, डा. राजिन्दर लहरी, प्रसिद्ध निर्देशक जोड़ी लक्खा लहरी और डा. इन्द्रजीत गोल्डी, चंडीगढ़ से संजीवन सिंह, अनीता शबदीश, डा. दिलबाग सिंह और डा. सुखजीत कौर, फिरोजपुर से डा. जगदीप संधू और रंग हरजिन्दर, जालंधर से डा. गुरजीत गुरी, गुरविन्दर, डा. रविन्द्र कौर और सुरिन्दरपाल सिंह, लुधियाना से राजविन्दर समराला, मोही अमरजीत और कमलजीत कौर और नए रिर्सच स्कालरों में से अमनदीप मोनी, डा. बलविन्दर सिंह, सुखविन्दर सुखी, अनायत अली, डा. किरन, गुलाब सिंह, गुरदीप गामीवाला, प्रकट घुमाण, सतपाल सिंह, प्रिंसिपल दलजीत हठूर, चमकौर सिंह, हरजीत लांबा, हरदीप सिंह ने समुचे प्रोग्राम में बहुत सरगर्मी के साथ भाग लिया ।
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