लुधियाना, 25 मार्च 2025: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने लुधियाना नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी करने के लिए नगर निगम द्वारा उनसे 1.83 करोड़ रुपये वसूलने से जुड़ा हुआ है। याचिका में नगर निगम कमिश्नर, म्युनिसिपल टाउन प्लानर (एमटीपी) सहित करीब आधा दर्जन अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
रवनीत सिंह बिट्टू ने 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा था। नामांकन दाखिल करने से पहले उन्हें नगर निगम से एनओसी लेना जरूरी था। इसके लिए उन्होंने आवेदन किया, लेकिन नगर निगम ने उन्हें 1.83 करोड़ रुपये जमा करने का नोटिस थमा दिया। यह राशि सरकारी कोठी के किराये के बकाये और 100 फीसदी जुर्माने के तौर पर मांगी गई थी। नगर निगम का दावा था कि बिट्टू 2016 से इस कोठी में “अवैध रूप से” रह रहे थे और इसे कभी औपचारिक रूप से उनके नाम आवंटित नहीं किया गया था।
बिट्टू ने इस मांग को पूरा करने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन गिरवी रखकर पैसे जुटाए और नामांकन से ठीक पहले यह राशि जमा की थी।
रवनीत सिंह बिट्टू का पक्ष
याचिका में बिट्टू ने दावा किया कि यह कोठी उन्हें सुरक्षा कारणों से दी गई थी, क्योंकि वह जेड-प्लस श्रेणी के सुरक्षित व्यक्ति हैं। उनके दादा, पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के बाद उन्हें यह सुविधा मिली थी। बिट्टू का कहना है कि 2016 से 2024 तक तीन अलग-अलग सरकारें पंजाब में सत्ता में रहीं, लेकिन कभी भी उन्हें “अवैध कब्जेदार” नहीं कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नोटिस चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी AAP के इशारे पर जारी किया गया, ताकि उनकी उम्मीदवारी को रोका जा सके। बिट्टू ने कहा, “मुझे रात 12 बजे यह नोटिस मिला। यह एक सियासी साजिश थी।”
कोर्ट में होगी सुनवाई
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दायर इस याचिका में बिट्टू ने नगर निगम के फैसले को रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा आधार पर दी गई कोठी के लिए किराया और जुर्माना वसूलना गलत है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की उम्मीद है।
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