पंजाब सरकार द्वारा नेशनल एग्रीकल्चरल मार्किटिंग पालिसी का मसौदा रद्द करना सराहनीय कदम : बरसट
पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन ने कहा – एग्रीकल्चर राज्यों का अधिकार, केंद्र सरकार न दे दखल
चंडीगढ़, 27 फरवरी : पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन स. हरचंद सिंह बरसट ने पंजाब सरकार की ओर से भारत सरकार के नेशनल एग्रीकल्चरल मार्किटिंग पालिसी के मसौदे को रद्द करने के फैसले की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है और भविष्य में भी खड़ी रहेगी।
स. बरसट ने कहा कि एग्रीकल्चर राज्य सरकारों का अधिकार है। इसलिए केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा नेशनल एग्रीकल्चरल मार्किटिंग पालिसी का मसौदा रद्द करना बहुत ही अच्छा कार्य है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने यह अच्छी पहल की है और अब अन्य राज्यों को भी चाहिए कि वह पंजाब की तरह नेशनल एग्रीकल्चरल मार्किटिंग पालिसी के मसौदे को रद्द करें, ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
चेयरमैन ने कहा कि पंजाब खेती प्रधान राज्य है और पंजाब का मंडी सिस्टम भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के मंडी सिस्टमों में सबसे बढ़िया सिस्टम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों से धक्केशाही करने लगी हुई है। पहले तीन काले कानून लेकर आई, जिससे खेती पर कार्पोरेट घरानों का कब्जा हो सके और अब नेशनल एग्रीकल्चरल मार्किटिंग पालिसी लेकर आई है, जो पूरी किसानों के खिलाफ और कॉरपोरेट के पक्ष में बनाई गई है, जिसे कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह किसान विरोधी फैसले लेना बंद करे और किसानों को फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी प्रदान करे तथा उनकी मांगों को पूरा करे। इसके साथ ही स. बरसट ने कहा कि पंजाब के मंडी सिस्टम को ओर अपग्रेड करने के लिये केंद्र सरकार द्वारा जो आरडीएफ रोका हुआ है, उसे तुरंत जारी किया जाए, तांकि पंजाब के किसान, मजदूर, आढ़ती और व्यापारी वर्ग को लाभ हो सके।