पावर जूनियर इंजीनियर्ज ने पीएसपीसीएल के डिविजनल दफ्तर आगे की रोष रैली

मांगों को लेकर की जोरदार नारेबाजी

by TheUnmuteHindi
पावर जूनियर इंजीनियर्ज ने पीएसपीसीएल के डिविजनल दफ्तर आगे की रोष रैली

पावर जूनियर इंजीनियर्ज ने पीएसपीसीएल के डिविजनल दफ्तर आगे की रोष रैली
– मांगों को लेकर की जोरदार नारेबाजी
पटियाला, 1 फरवरी : केंद्र सरकार के लाभ कमाने वाले यूटी बिजली विभाग चंडीगढ़ को सभी आम प्रक्रिया की जरूरतों को नजरअंदाज करते हुए एक प्राईवेट कंपनी को सौंपने के फैसले का विरोध करते हुए पी.एस.पी.सी.एल. में काम करते पावर जूनियर इंजीनियर्ज और पदउन्नित इंजीनियर्ज की तरफ से आज सभी पी. एस. पी. सी. एल. के डिविजनल मुख्य दफ्तरों में रोष रैलियां करके जोरदार नारेबाजी की गई।
इस मौके इंजी. दविन्दर सिंह राज्य महा सचिव कौंसिल आफ जूनियर इंजीनियर्ज पी.एस.ई.बी., राज्य प्रधान इंजी. परमजीत सिंह खटड़ा और राज्य महा सचिव इंजी. दविन्दर सिंह सांझे तौर पर बताया कि यूटी प्रशासन चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पावर सैक्टर की सुविधाएं/ विभागों के हाल ही में निजीकरण के फैसले कारण लगभग 80, 000 पक्के/ स्थाई और 50,000 आउटसोर्स कर्मचारियों और लगभग 1 करोड़ 65 लाख खप्तकार प्रभावित होने जा रहे हैं। नेशनल कोआर्डीनेशन कमेटी आफ इलैक्टरिसिटी इम्प्लाईज एंड इंजीनियर्ज के बैनर तले देश भर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्ज निजीकरण की इन पहलकदमियों के विरुद्ध लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
कौंसिल लीडरशिप ने आगे बताया कि चंडीगढ़ बिजली विभाग 2019— 20 में 365 करोड़, 2021 में 225 करोड़, 2021— 22 में 261 करोड़ के सालाना लाभ के साथ एक मिसाली विभाग है, जिस की तरफ से कुल तकनीकी और व्यापारिक घाटे को 10 प्रतिशत से कम रखा है जब कि राष्ट्रीय औसत 15 प्रतिशत से अधिक है। चंडीगढ़ बिजली विभाग को भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (कम कीमत वाली हाईड्रो पावर को यकीनी बनाना) से अनुकूल लंबी मियाद की ऊर्जा बांट दी गई है और साथ ही कम कीमत वाली बिजली यकीनी बनाने के लिए केंद्रीय सैक्टर जनरेशन स्टेशनों से भी अलाटमैंट दी गई है। चंडीगढ़ बिजली विभाग का टैरिफ लगभग 4.50 रुपए प्रति यूनिट है जो कि देश में सबसे कम है।
उन्होंने आगे बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से यूटी बिजली विभाग चंडीगढ़ के कर्मचारियों के सम्बन्ध में कोई ट्रांसफर स्कीम तैयार नहीं की गई है, जहां पहले उनको केंद्र सरकार के कर्मचारियों अनुसार माना जाता था। अब निजीकरण के इस कदम के साथ उनको अचानक निजी क्षेत्र के कर्मचारियों में तबदील कर दिया जायेगा, जो कि बिजली एक्ट 2003 का उल्लंघन है और मुलाजिमों के हितों के साथ घोर धक्का किया जा रहा है। कौंसिल लीडरशिप ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार की तरफ से जा रही निजीकरण की कोशिशों को तुरंत रोकने की जोरदार मांग की और ऐसी कार्यवाही करने से पहले अलग— अलग स्टेक होलडर्ज के साथ विचारचर्चा करने की अपील की है।

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