मोहाली, 28 मार्च 2025: पंजाब के स्वयंभू पादरी बजिंदर सिंह को मोहाली की पॉक्सो कोर्ट ने 2018 के यौन उत्पीड़न और बलात्कार मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया, जबकि सजा का ऐलान 1 अप्रैल 2025 को होगा। इस मामले में बजिंदर सिंह अंतिम सुनवाई के लिए छह अन्य आरोपियों के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। हालाँकि, पाँच अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया, लेकिन बजिंदर के खिलाफ पुख्ता सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी करार दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2018 का है, जब जीरकपुर की एक महिला ने बजिंदर सिंह पर यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि चमत्कार के नाम पर लोगों की बीमारियाँ ठीक करने का दावा करने वाले इस पादरी ने उसका भरोसा तोड़ा और उसके साथ गलत काम किया। शिकायत के बाद पुलिस ने बजिंदर सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि बजिंदर ने मोहाली के सेक्टर 63 में अपने घर पर उसके साथ बलात्कार किया और इस हरकत को रिकॉर्ड कर लिया।
बाद में उसने इस वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और धमकी दी कि अगर उसने उसकी बात नहीं मानी तो वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देगा।
जुलाई 2018 में जब यह मामला सामने आया, तो बजिंदर सिंह फरार हो गए थे। वह लंदन भागने की फिराक में थे, लेकिन दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। उस वक्त से वह जमानत पर बाहर थे और कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। करीब सात साल बाद अब इस मामले में फैसला आया है।
पीड़िता के गंभीर आरोप
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, बजिंदर सिंह ने जालंधर के ताजपुर गांव में अपने चर्च में एक नाबालिग लड़की के साथ भी गलत हरकत की थी। पीड़िता ने बताया कि बजिंदर ने उसका फोन नंबर हासिल किया और उसे आपत्तिजनक मैसेज भेजने शुरू कर दिए। हर रविवार को वह उसे चर्च के एक कमरे में अकेले बिठाता था और गलत तरीके से छूता था। डर की वजह से पीड़िता ने अपने परिवार को यह बात नहीं बताई। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कपूरथला पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) बनाकर जाँच की थी, जिसके बाद कोर्ट में सबूत पेश किए गए।
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