IMF Loan To Pakistan: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर है। पाकिस्तान आर्थिक व कूटनीतिक रूप से दबाव में है। हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थक करार देते हुए कई सख्त कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि का निलंबन, वाघा-अटारी सीमा बंद करना, और पाकिस्तानी राजनयिकों का निष्कासन शामिल है। इसके साथ ही, भारत अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के जरिए पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है।
IMF की आगामी बैठक और भारत की रणनीति
IMF की कार्यकारी बोर्ड की बैठक 9 मई 2025 को निर्धारित है, जिसमें पाकिस्तान को $1.3 अरब के जलवायु लचीलापन ऋण (Resilience and Sustainability Facility) और $7 अरब के बेलआउट पैकेज की पहली समीक्षा पर चर्चा होगी। इस पैकेज के तहत अगली किश्त लगभग $1.1 अरब की हो सकती है। भारत ने IMF से पाकिस्तान को दी जाने वाली इस वित्तीय सहायता की समीक्षा करने की मांग की है, यह आरोप लगाते हुए कि पाकिस्तान इन फंड्स का दुरुपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने या भारत के खिलाफ सैन्य तैयारियों के लिए कर सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, भारत ने इस मुद्दे को IMF के समक्ष उठाया है, हालांकि IMF और भारत के वित्त मंत्रालय ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
भारत का रुख
भारत ने पहले भी IMF की बैठकों में पाकिस्तान को दिए जाने वाले ऋणों पर तटस्थ रुख अपनाया था, लेकिन जनवरी 2024 में भारत ने IMF से पाकिस्तान के फंड्स की कड़ी निगरानी की मांग की थी, ताकि इनका उपयोग रक्षा खर्च या विदेशी कर्ज चुकाने में न हो। अब, पहलगाम हमले के बाद, भारत का रुख और सख्त हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार से अपेक्षा जताई है कि भारत इस $1.3 अरब के ऋण का कड़ा विरोध करे। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान की आर्थिक सहायता आतंकवाद विरोधी उपायों और सुधारों पर सशर्त होनी चाहिए, और इसका दुरुपयोग भारत के खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए।
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