भाषा विभाग पंजाब की तरफ से मातृभाषा दिवस मौके पंजाबी भाषा का भविष्य : संभावनाएं और चुनौतियां विषय पर गोष्टी
पटियाला, 22 फरवरी : भाषा विभाग पंजाब की तरफ से आज मातृ भाषा दिवस मौके पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में पंजाबी भाषा का भविष्य संभावनाएं और चुणौतियां विषय पर गोष्टी करवाई गई। विभाग के डायरैक्टर स. जसवंत सिंह जफर के नेतृत्व में करवाई गई इस गोष्टी में प्रसिद्ध विद्वान डा. जोगा सिंह, डा. सरबजीत सिंह, डा. सिकन्दर सिंह और डा. बूटा सिंह बराड़ ने मुख्य प्रवक्ताओंं के तौर पर शिरकत की और डा. राजविन्दर सिंह ने उक्त विद्वानों के साथ संवाद रचाया।
डा. जोगा सिंह ने कहा कि मातृ भाषा की आम जनजीवन और दूसरे क्षेत्रों में अहमीयत बारे प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछली सदी के आठवें दशक से पहले हमारे अंग्रेजी माध्यम का कोई रुझान नहीं था परन्तु सोची- समझी नीति के अंतर्गत इस भाषा को हमारी भाषा पर हमले की तरह प्रचारित किया गया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा बारे एक वृतांत सृजन किया गया है कि इस माध्यम में पढक़र व्यक्ति और ज्यादा ज्ञानवान बनता है। इस भ्रम को दूर करने की बहुत जरूरत है। डा. बूटा सिंह बराड़ ने कहा कि भाषा चलते, फिरते और बूंद बूंद गिरते शब्दों का काफिला होता है। जिसमें हमेशा कम ज्यादा चलता रहता है। फिर भी वही शब्द प्रवान होते हैं, जो लेागों की जुबान पर अधिक चढ़ते हैं7 भाषा के रूप में तबदीलियां होती रहती हैं। इसी तरह पंजाबी भाषा के सरूप में तबदीलियां होती रही हैं, इसको खतरा नही मानना चाहिए बल्कि एक वरतारे के तौर पर लेना चाहिए। इस मौके डा. सरबजीत सिंह ने कहा कि हमेशा ही भाषा को प्रफुल्लित करने के लिए राजनैतिक सरप्रस्ती की बहुत जरूरत होती है। उनहोंने कहा कि पंजाबी भाषा को आ रही चुणौतियों का मुकाबला करने के लिए अध्यापक की भूमिका सब से बड़ी है। इस मौके डा. गुरमुख सिंह प्रमुख पंजाबी विभाग पंजाबी यूनिवर्सिटी, डा. राजिन्दरपाल सिंह बराड़, डा. गुरसेवक लंबी, भाषा विभाग के खोज अफसर डा. सुखदरशन सिंह चहल, जिला भाषा अफसर डा. मनजिन्दर सिंह, डा. राज मोहिंदर कौर और बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।
भाषा विभाग पंजाब की तरफ से मातृभाषा दिवस मौके पंजाबी भाषा का भविष्य : संभावनाएं और चुनौतियां विषय पर गोष्टी
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