बिहार में PNG गैस को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, 18 जिलों में 24 घंटे में अनुमति

by Manu
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पटना, 21 मार्च 2026: बिहार के उप मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य के 18 जिला मुख्यालयों में PNG की आधारभूत संरचना पहले से उपलब्ध है। इन जिलों में पटना, गया, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा, जमुई, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, लखीसराय, मुंगेर, सहरसा, मधेपुरा, भोजपुर, पूर्णिया, औरंगाबाद और रोहतास शामिल हैं।

वर्तमान में इन जिलों में लगभग एक लाख घरों को पाइप के माध्यम से रसोई गैस के रूप में PNG उपलब्ध कराई जा रही है। गैस वितरण कंपनियों ने बताया है कि वे 75 हजार से अधिक घरेलू कनेक्शन 24 घंटे के भीतर और 70 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को एक सप्ताह के भीतर PNG कनेक्शन दे सकती हैं। सैकड़ों व्यावसायिक उपभोक्ता और कई औद्योगिक इकाइयां भी PNG का उपयोग कर रही हैं।

उप मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि LPG की तुलना में PNG अधिक किफायती, सुरक्षित और प्रभावी है। इसकी आपूर्ति ज्यादातर देश के भीतर ही होती है। इसलिए PNG के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।

राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से निर्णय लागू किए हैं कि गैस कंपनियों द्वारा गैस वितरण प्रणाली या संयंत्र स्थापना के लिए मांगी गई अनुमति संबंधित नगर निकाय 24 घंटे के भीतर जारी करेगा। यदि समय पर अनुमति नहीं मिलती तो आवेदक कंपनी को स्वतः अनुमति मानी जाएगी। गैस कंपनियों की लिखित प्रतिबद्धता पर आधारभूत संरचना के पुनर्स्थापन के अपने खर्च पर काम करने की अनुमति भी 24 घंटे में अनिवार्य रूप से दी जाएगी। समय पर अनुमति न मिलने पर स्वतः मंजूर मानी जाएगी। सरकारी गैस वितरण कंपनियों को गैस वितरण प्रणाली स्थापना के लिए सांकेतिक दर पर तुरंत भूमि उपयोग की अनुमति दी जाएगी। गैस कंपनियों को 24 घंटे काम करने की अनुमति होगी। नगर निकाय द्वारा लिखित रूप से विशेष अवधि के लिए प्रतिबंध न लगाए जाने तक किसी भी समय पाइपलाइन और संयंत्र का काम कर सकेंगे।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बांका, गोपालगंज, सीवान, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सीतामढ़ी, शिवहर, नवादा, भागलपुर, खगड़िया, अरवल, जहानाबाद, बक्सर, अररिया, कटिहार, किशनगंज और कैमूर जैसे शेष जिलों में भी शहरी गैस वितरण प्रणाली स्थापित करने के लिए तेल कंपनियों के साथ नियमित और सघन समन्वय जरूरी है। इन जिलों के नगर निकायों के साथ नियमित समीक्षा कर भूमि आपत्ति और अन्य अनुमतियां समयबद्ध तरीके से प्रदान की जाएं।

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