पंजाबी साहित्य सभा पटियाला की तरफ से दविन्दर पटियालवी के काव्य संग्रह ‘कोमल पत्तीयां का उलांभा’ का लोर्कापण
– लेखकों की रचना के विकास में साहित्य सभाएं उसारू भूमिका : डा. दर्शन ङ्क्षसह आष्ट
पटियाला, 13 जनवरी : पंजाबी साहित्य सभा (रजि.) पटियाला की तरफ से भाषा विभाग, पंजाब, पटियाला में यादगारी साहित्यक समागम करवाया गया। समागम के अध्यक्षता मंडल में सभा के प्रधान डा. दर्शन सिंह आष्ट के अलावा मुख्य मेहमान के तौर पर साउथ एशियन रिव्यू के विरासत फाउंडेशन, कैनेडा के प्रधान भुपिंदर ङ्क्षसह मल्ही शामिल हुए, जबकि प्रधानगी प्रसिद्ध विद्ववान डॉ. गुरबचन ङ्क्षसह राही ने की। प्रसिद्ध शिरोमणिक वि सरदार पंछी, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियालाक े पंजाबी भाषा विकास विभाग के मुखी डॉ. परमिंदर जीत कौर व पूर्व जिला लोक संपर्क अफसर उजागर ङ्क्षसह ने विशेष महमान के तौर पर शिरकत की। इस समागम के आरंभ में सभा के प्रधान डॉ. दर्शन ङ्क्षसह आष्अ ने दविंदर पटियालवी की काव्य सिरजना व उसकी साहित्य सभा के साथ चिरोकणी सांझ के हवाले के साथ कहा कि लेखकों की रचना के विकास में साहित्य सभाएं उसारू भूमिका निभाती हैं।
इस उपरांत सभा के महा सचिव और मिनी कहानी रसाले छिण के दविंदर पटियालवी की पुस्क कोमल पत्तीयां का उलांभा का लोर्कापण किया गया। डॉ. गुरबचन ङ्क्षसह राही ने कहा कि पटियालवी की कविता मानवी संवेदना को प्रस्तुत करती है। चढ़ते और लहते पंजाब के कवियों का जिक्र करते हुएभुपिंदर ङ्क्षसह मल्ही का मत था कि पटियालवी जैसे कलमकार एक सी ऊर्जा के साथ सभा व कल्म की खिदमत कर रहे हैं। सरदार पंछी ने अपने अनोखे शायराना अंदाज में कलाम पेश करके खूब वाह वाह प्राप्तकी। जबकि डा. परमिंदर जीत कौर का मानना था कि बुजुर्ग साहित्यकारों की दस्तावेजी फिल्में बनानी चाहिए। इस दौरान बलबीर सिंह दिलदार, अमर गर्ग कलमदान, भुपिन्दर कौर वालिया, सतीश विद्रोही, पंमी हबीब, विक्रमजीत सिंह, हरदीप सभ्रवाल, जतिन्दरपाल सिंह नागरा, इंजी. जगराज सिंह, पूजा शर्मा, साहिल शर्मा, हरमेश कुमार, गोपाल शर्मा, हरदीप सिंह दीपा आदि मौजूद थे।
पंजाबी साहित्य सभा पटियाला की तरफ से दविन्दर पटियालवी के काव्य संग्रह ‘कोमल पत्तीयां का उलांभा’ का लोर्कापण
लेखकों की रचना के विकास में साहित्य सभाएं उसारू भूमिका : डा. दर्शन ङ्क्षसह आष्ट
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