वक्फ संशोधन एक्ट पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, जानिए क्या है मांग?

by Manu
वक्फ संशोधन एक्ट सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2025: वक्फ संशोधन एक्ट पर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बहुत ही महतपूर्ण सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, पीवी संजय कुमार और केवी विश्वनाथन की तीन न्यायाधीशों की पीठ याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 की वैधानिकता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में 20 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं। अधिकांश याचिकाएं कानून के खिलाफ हैं, हालांकि कुछ याचिकाएं कानून का समर्थन भी करती हैं। ऐसी दो याचिकाएं भी हैं जिनमें मूल वक्फ कानून, वक्फ अधिनियम 1995 को चुनौती दी गई है तथा उसे निरस्त करने की मांग की गई है।

वक्फ संशोधन एक्ट : केंद्र सरकार ने दाखिल की कैविएट

बुधवार की सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि कुछ याचिकाओं में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है, लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट भी दाखिल की है ताकि सुप्रीम कोर्ट एकतरफा सुनवाई कर कोई अंतरिम आदेश पारित न कर दे। अदालत को कोई भी आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष भी सुनना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय में वक्फ अधिनियम की वैधानिकता को चुनौती देने वालों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इतियाहादुल मुस्लिमीन (AIMAM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स शामिल हैं।

इसके अलावा आरजेडी सांसद मनोज झा, डीएमके सांसद ए राजा, समस्त केरल जमीयतुल उलमा, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, इंडियन मुस्लिम लीग, अंजुम कादरी, तैयब खान, एपीसीआर (एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स), तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान और कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 का विरोध करते हुए याचिका दायर की है।

सात राज्यों ने किया वक्फ कानून का समर्थन

जबकि सात राज्यों राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, असम, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर वक्फ संशोधन अधिनियम का समर्थन किया है। इसके अलावा वक्फ के मूल कानून को निरस्त करने की मांग को लेकर भी कुछ याचिकाएं दायर की गई हैं।

 वकील हरिशंकर जैन की अपील

सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन और उत्तर प्रदेश निवासी पारुल खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर वक्फ अधिनियम 1995 को निरस्त करने की मांग की है और कहा है कि यह हिंदुओं और गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है।

इन दोनों याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि अदालत यह घोषित करे कि वक्फ संशोधन एक्ट के तहत जारी आदेश हिंदुओं और गैर-मुस्लिमों की संपत्तियों पर लागू नहीं होंगे।

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