नई दिल्ली , 19 फ़रवरी 2025: G20: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 20-21 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका का दौरा करेंगे, जहां वे ग्रुप ऑफ 20 (जी20) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा दक्षिण अफ्रीका के अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सहयोग मंत्री रोनाल्ड लामोला के निमंत्रण पर हो रहा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जी20 की बैठक में भारत की सक्रिय भागीदारी से न केवल जी20 देशों के साथ भारत के संबंध और मजबूत होंगे, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण की आवाज को भी मजबूती प्रदान करेगा। इस महत्वपूर्ण मंच पर, विदेश मंत्री एस जयशंकर की कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी होने की संभावना है, जिससे भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और अधिक प्रगति मिल सके।
G20 : वैश्विक अर्थव्यवस्था की एक अहम ताकत
जी20 में दुनिया की प्रमुख 19 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ भी इसके सदस्य हैं। ये 19 सदस्य देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 85 प्रतिशत, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 75 प्रतिशत और दुनिया की लगभग दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जी20 की अध्यक्षता हर साल एक सदस्य देश द्वारा की जाती है, जो सदस्य देशों के एक क्षेत्रीय समूह से चुना जाता है। इसके तहत, सदस्य देशों को पांच समूहों में बांटा जाता है, जिनमें से प्रत्येक में अधिकतम चार देश शामिल होते हैं।
दक्षिण अफ्रीका ने जी20 की अध्यक्षता संभाली
दक्षिण अफ्रीका ने 1 दिसंबर 2024 से 2025 तक जी20 की अध्यक्षता संभाली है, और इस वर्ष के जी20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। यह देश वैश्विक मंचों पर अपनी सक्रिय भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है, और अब जी20 की अध्यक्षता के माध्यम से वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने संबंधों को और अधिक प्रगति देने के लिए तत्पर है।
अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान: G20 शिखर सम्मेलन से दूरी
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले यह घोषणा की थी कि वह दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की कुछ नीतियों पर चिंता व्यक्त की, जिसमें निजी संपत्ति के अधिग्रहण और “विविधता, समानता और समावेश (डीईआई)” तथा “जलवायु परिवर्तन” को बढ़ावा देने के लिए जी20 मंच का उपयोग करने को लेकर असहमति जताई। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने “एकजुटता, समानता और स्थिरता” को बढ़ावा देने के लिए जी20 का मंच सही तरीके से उपयोग नहीं किया।
भारत की भूमिका और वैश्विक मुद्दों पर दृष्टिकोण
भारत ने हमेशा ही जी20 जैसे मंचों पर अपनी प्रमुख भूमिका निभाई है, और विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह दौरा भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को और स्पष्ट करता है। भारत के लिए यह अवसर है कि वह वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को और मजबूत करे, साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग बढ़ाए। भारत का यह उद्देश्य सिर्फ अपनी बाहरी नीतियों को मजबूत करने का नहीं है, बल्कि वैश्विक समस्याओं, जैसे जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता और समावेशन पर भी अपनी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है।
इस बार की जी20 बैठक में, उम्मीद की जा रही है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और भारत के दृष्टिकोण को अन्य देशों के समक्ष रखेंगे।
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