नई दिल्ली , 31 जनवरी 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की जगह कोई अन्य मुद्रा अपनाने का प्रयास किया, तो उन्हें अपने निर्यात पर 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि वह डी-डॉलराइजेशन के खिलाफ हैं और ब्रिक्स देशों को अमेरिकी डॉलर की वैश्विक भूमिका को बनाए रखना चाहिए।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट मे कहा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह विचार कि ब्रिक्स देश डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हम चुपचाप यह सब देख रहे हैं, अब खत्म हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा, “हमें इन देशों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ना तो कोई नई ब्रिक्स मुद्रा बनाएंगे और ना ही अमेरिकी डॉलर की जगह किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे। अगर ऐसा किया तो उन्हें 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा और उन्हें अमेरिकी बाजार से अलविदा कहने की उम्मीद करनी चाहिए।”
ब्रिक्स समूह मे शामिल देश
ब्रिक्स देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – ने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाने की चर्चा की है। विशेष रूप से रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद, ब्रिक्स देशों ने आपसी आर्थिक सहयोग को बढ़ाया है। इसके अलावा, हाल ही में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को भी ब्रिक्स समूह में शामिल किया गया है।
हालांकि, ब्रिक्स देशों के पास कोई साझा मुद्रा नहीं है, फिर भी उन्होंने अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। 2023 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डी-डॉलरीकरण की आवश्यकता को स्वीकार किया और कहा कि ब्रिक्स देशों को अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करना चाहिए और बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाना चाहिए।
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में क्या हुआ
रूस में 2024 में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, जहां सदस्य देशों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल की वकालत की। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर अभी भी दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा बनी हुई है। अटलांटिक काउंसिल के एक अध्ययन में यह पाया गया कि न तो यूरो और न ही ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को प्रभावी रूप से कम किया है।
ट्रंप (Donald Trump) की धमकियों का उद्देश्य अमेरिका के डॉलर प्रभुत्व को बनाए रखना है। उन्होंने इस तरह के टैरिफ का इस्तेमाल पहले भी किया है, जैसे मैक्सिको और कनाडा पर व्यापारिक टैरिफ लगाने के दौरान। ट्रंप का मानना है कि इन टैरिफ के माध्यम से अमेरिकी व्यवसायों और श्रमिकों को लाभ हो सकता है, और इससे फैक्ट्रियाँ वापस अमेरिका आ सकती हैं।
हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह के टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, विशेष रूप से उन उद्योगों में जो आयातित कच्चे माल पर निर्भर करते हैं। इस पर और भी चिंता जताई जा रही है कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को उच्च कीमतों का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर समग्र आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
ट्रंप (Donald Trump) का यह बयान ब्रिक्स देशों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है, और इसका असर वैश्विक व्यापार और मुद्रा नीति पर लंबी अवधि में देखा जा सकता है।
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