दिल्ली, 17 सितंबर 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी लताड़ लगाते हुए सवाल किया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अब तक सरकारी आवास क्यों नहीं मिला। जस्टिस सचिन दत्ता ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताई और कहा कि सरकार का रवैया ऐसा लगता है जैसे वह “सबके लिए खुला” सिस्टम चला रही हो, और मनमाने तरीके से बंगले आवंटित नहीं कर सकती। कोर्ट ने केंद्र को 18 सितंबर तक जनरल पूल आवास आवंटन की नीति और वेटिंग लिस्ट की पूरी जानकारी के साथ रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया।
AAP की ओर से कोर्ट में पेश वकील ने तर्क दिया कि पार्टी ने केजरीवाल के लिए 35 लोदी एस्टेट स्थित बंगले की मांग की थी, जो पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के पास था। लेकिन केंद्र सरकार ने बार-बार समय मांगने के बावजूद यह बंगला किसी और को दे दिया। वकील ने कहा कि सरकार की इस टालमटोल से साफ है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
AAP के वकील ने बताया कि केजरीवाल ने सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद 4 अक्टूबर को अपना आधिकारिक आवास खाली कर दिया था और तब से वे पार्टी के किसी सदस्य के घर पर रह रहे हैं। AAP का कहना है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता के तौर पर केजरीवाल को सरकारी आवास का हक है। कोर्ट की अगली सुनवाई में केंद्र को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना होगा।
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