Cyber Fraud: साइबर ठगों ने दो घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट, फिर डराकर ठग लिए 3 लाख रुपये

by Manu
डिजिटल अरेस्ट

यमुनानगर, 9 जुलाई 2025: प्रतापनगर क्षेत्र में एक उर्वरक (फर्टिलाइजर) विक्रेता को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 3 लाख 10 हजार रुपये की ठगी का शिकार बनाया। ठगों ने पुलिस और सीबीआई अधिकारियों का रूप धरकर विक्रेता को डराया और कहा कि उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है। उन्होंने धमकी दी कि अगर कॉल डिस्कनेक्ट किया तो स्थानीय पुलिस उसके पूरे परिवार को तुरंत गिरफ्तार कर लेगी। डर के मारे विक्रेता ने ठगों की बात मानकर पैसे ट्रांसफर कर दिए।

ठगों ने कैसे दिया इस साइबर ठगी को अंजाम?

यह हादसा 5 जुलाई को शुरू हुआ, जब विक्रेता को एक कॉल आया। जल्दबाजी में उन्होंने कॉलर की पहचान नहीं की और फोन उठा लिया। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताया और दावा किया कि विक्रेता के नंबर से कई सिम जारी हुए हैं, जिनका दुरुपयोग हुआ है। ठगों ने विक्रेता का आधार नंबर तक बता दिया और कहा कि उनके नंबर से अश्लील वीडियो भेजे गए हैं, जिनके खिलाफ मुंबई में 17 शिकायतें और एक आपराधिक मामला दर्ज है।

कॉल को कथित तौर पर मुंबई के एक थाने में ट्रांसफर किया गया, जहां से बताया गया कि मामला सीबीआई के पास है। ठगों ने दावा किया कि एक एयरवेज कंपनी के मालिक ने 5,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया है, जिसमें से 10% कमीशन विक्रेता के खाते में आया है। उन्होंने विक्रेता को डराने के लिए फर्जी दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और सीबीआई लोगो वाले कागजात, व्हाट्सएप पर भेजे। साथ ही धमकी दी कि अगर कॉल काटी तो परिवार समेत तुरंत गिरफ्तारी होगी।

लगभग दो घंटे तक विक्रेता को “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया, जिस दौरान ठगों ने दबाव बनाकर 3 लाख 10 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। कॉल कटने के बाद विक्रेता ने अपने दोस्त से बात की, जिसने बताया कि यह साइबर ठगी है।

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