सहरसा, 03 अप्रैल 2026: आपदा को अवसर में तब्दील करते हुए सहरसा जिले के ग्राम पंचायत सहसौल में खेत में वर्षों से जल भराव की समस्या का किसानों ने मखाना की खेती से ऐसा हल निकाला है जो उन्हें लखपति बना रहा है। साथ में इससे पर्यावरण संतुलन का एक नया अध्याय शुरू भी हुआ है।
सहसौल में 19 किसान जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक जीवन में क्रांतिकारी बदलाव किया है। गांव के किसान गणेश कुमार महतो बताते हैं कि गांव के कई एकड़ जमीन में वर्ष भर जल भराव की समस्या बनी रहती थी। किसान खुद का जमीन होने के बाद भी धान,गेहूं आदि पारंपरिक खेती से महरूम थे। इसकी वजह से अधिकांश ग्रामीण या तो पलायन के लिए विवश थे या फिर दिहाड़ी के सहारे किसी तरह भरण-पोषण करने की मजबूरी थी।
ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जल-जीवन-हरियाली अभियान के अस्तित्व में आने के बाद गांव के किसानों को कई महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी मिली। उन्होंने मनरेगा मजदूरों के सहारे वर्षों से खराब पड़ी पानी से लबालब उपेक्षित जमीन को पोखर के रूप में तैयार किया और फिर इसमें मखाने की खेती शुरू की। आज गांव के 19 किसानों के लिए पोखर रूपी यह पोंड वार्षिक रूप से प्रति किसान के हिसाब से न्यूनतम 50 हजार रुपए की आमदनी का जरिया बन चुका है।
महतो बताते हैं कि मखाने की खेती में उन्हें अधिकतम 15 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। इसकी तुलना में खेती से वह तीन गुना से भी अधिक आमदनी कमा रहे हैं। इन किसानों का मानना है कि बाजार में मखाने की कीमत 600-1200 रुपए प्रति किलो आसानी से मिल जाती है।
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