पटियाला : भूपिंदरा इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल ने अपने छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे JEE, NEET, UPSC, ओलंपियाड और NTSE के लिए छठी कक्षा से ही तैयार करने की अनोखी पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सशक्त बनाना है, लेकिन बिना उन पर पढ़ाई का कोई अतिरिक्त बोझ डाले । BIPS की प्रिंसिपल डॉ. इंदु शर्मा ने इस पहल के बारे में बताया, “हमारा फोकस छात्रों को ‘प्रेशर’ नहीं, बल्कि ‘प्रैक्टिस’ के जरिए तैयार करना है। इस कार्यक्रम में पाठ्यक्रम को रोचक गतिविधियों, इंटरएक्टिव क्लासेस और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स के साथ जोड़ा गया है, ताकि बच्चे बिना तनाव के अवधारणाओं को समझ सकें। हम उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न से परिचित कराते हैं, लेकिन इसके लिए अलग से कोई एक्स्ट्रा क्लास या होमवर्क नहीं दिया जाता।”
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ :
कॉन्सेप्ट-बेस्ड लर्निंग : गणित और विज्ञान को रोजमर्रा के उदाहरणों से जोड़कर पढ़ाया जाता है, जिससे छात्रों की तार्किक सोच विकसित होती है ।
मासिक मॉक टेस्ट: छात्रों को परीक्षा के माहौल का अभ्यास कराने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके से डिज़ाइन किए गए टेस्ट लिए जाते हैं, जिनका उद्देश्य डर खत्म करना है ।
करियर गाइडेंस वर्कशॉप : बच्चों की रुचियों को पहचानकर उन्हें उनके स्ट्रॉन्ग एरिया में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है ।
माइंड मैपिंग एक्टिविटीज़ : पढ़ाई को याददाश्त-आधारित न रखते हुए क्रिएटिव तरीकों से समझाया जाता है ।
हमारा लक्ष्य बच्चों को ‘रटंत विद्या’ की बजाय ‘समझदारी’ सिखाना है
डॉ. शर्मा ने जोर देकर कहा, “हमारा लक्ष्य बच्चों को ‘रटंत विद्या’ की बजाय ‘समझदारी’ सिखाना है । इसलिए कक्षा 6 से ही उन्हें छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स और ग्रुप डिस्कशन के जरिए तैयार किया जाएगा। इससे न तो उनकी पढ़ाई का बोझ बढ़ेगा और न ही उनकी उम्र के मुताबिक खेलने-सीखने के अवसर कम होंगे । BIPS का यह कार्यक्रम अभिभावकों के बीच भी खासा लोकप्रिय हो रहा है । पटियाला की एक माँ, श्रीमती प्रीति सिंह ने कहा, “मुझे डर था कि कहीं मेरे बेटे पर पढ़ाई का दबाव न बढ़ जाए, लेकिन BIPS के तरीके से वह घर पर भी साइंस के प्रयोग करने लगा है। यह देखकर खुशी होती है कि स्कूल बच्चों की रुचि को प्राथमिकता देता है ।