‘वोट-चोरी’ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा; SIR को तुरंत रद्द किया जाए- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

by Manu
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चंडीगढ़, 24 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि ‘वोट-चोरी’ भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है और मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) को रद्द करने की मांग करते हुए इस प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पंजाब विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा चुनाव आयोग की आड़ में अपने पक्ष में वोट जोड़कर और विपक्ष के वोट काटकर मतदाता सूचियों में हेराफेरी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव ‘वोट-चोरी’ के जरिए जीते गए थे।

मुख्यमंत्री ने इस बात की पुष्टि की कि देश उस चरण पर पहुंच चुका है, जहां कभी लोगों द्वारा चुनी गई भाजपा सरकार अब खुद यह तय कर रही है कि किसे वोट डालने का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि तानाशाही ने लोकतंत्र के चारों स्तंभों पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद पंजाब विधानसभा ने एस.आई.आर. के खिलाफ एक प्रस्ताव मौखिक मतदान से पारित किया, जो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा घोषित ‘दमनशाही’ और नागरिकों के वोट के अधिकारों को खतरे के खिलाफ पंजाब के विरोध को दर्शाता है।

एस.आई.आर. की चल रही प्रक्रिया के तहत नागरिकों के वोट के अधिकार की रक्षा करने वाले प्रस्ताव पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने एस.आई.आर. मुहिम की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित करके देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर योग्य नागरिक बिना किसी डर के अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वोट डालने का अधिकार किसी भी सरकार द्वारा दी गई कोई रियायत नहीं है। यह लोकतांत्रिक भागीदारी की नींव है और किसी भी योग्य नागरिक को अपनी योग्यता साबित करते समय अनावश्यक परेशानी या मनमानी का सामना नहीं करना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान ने हर नागरिक को समानता, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी की गारंटी दी है। उन्होंने समाज के विशेष वर्गों के वोट काटे जाने पर चिंता व्यक्त की और मतदाता सूचियों की संशोधन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “कोई भी प्रक्रिया जो यह तय करती है कि वोट डालने का अधिकार किसके पास है, उसे पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होना चाहिए। भारतीय लोकतंत्र की बुनियादों को बचाने के लिए हर योग्य नागरिक के वोट के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है।”

उन्होंने सवाल किया कि विधानसभा क्षेत्र में कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद ही आपत्तियां क्यों दर्ज की गईं और चुनाव आयोग ने अब अपनी बैठकों के कार्यप्रणाली को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड करने का फैसला क्यों किया है। आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्तों में कथित मतभेदों का हवाला देते हुए उन्होंने सार्वजनिक जांच के उच्च मानकों की मांग की।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) सहित केंद्रीय जांच एजेंसियों के कामकाज को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक और जांच संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से और बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, “देश के सामने सवाल आसान है: क्या भारत एक ऐसा लोकतंत्र बना रहेगा, जहां हर वोट मायने रखता है या क्या हम ऐसी व्यवस्था बनने देंगे, जहां सत्ता में बैठे लोग यह तय करेंगे कि किसकी आवाज सुनने योग्य है?”

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