केंद्रीय कृषि मंत्री ने की भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए पंजाब के किसानों की सराहना

by Manu
शिवराज सिंह चौहान

चंडीगढ़, 28 मार्च 2026: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसद में कहा कि देश, पंजाब के किसानों का उनके कड़ी मेहनत के लिए आभारी है। जिन्होंने हरित क्रांति द्वारा भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने तथा देशवासियों की भूख मिटाने में हमारी मदद की है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगे कहा कि श्री नानक देव जी पहले सिख गुरु थे ने जिन्होंने 15वीं शताब्दी में ही कोधरा जैसे मोटे अनाजों के उपयोग को बढ़ावा दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने भी ने मोटे अनाज (Millets) के महत्व को समझा है। केंद्रीय मंत्री राज्यसभा में सांसद सतनाम सिंह संधू द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

इससे पहले, प्रश्नकाल के दौरान, सांसद सतनाम सिंह संधू ने सरकार से उस पहलों नीतियों की जानकारी मांगी, जिसे पंजाब में मोटे अनाज की खेती को बढ़ाने के लिए बनाया गया है। यह नीति फसलों में विविधता लाने और धान जैसी पानी के अधिक खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों का अंग है। संसद में अपने संबोधन के दौरान, सांसद सतनाम संधू ने उस गंभीर स्थिति को सामने रखा जिसका सामना पंजाब आज ‘धान-गेहूं चक्र’ के कारण कर रहा है। सांसद सतनाम ने कहा कि पंजाब का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 40 लाख हेक्टेयर पर खेती होती है और इस क्षेत्र का 99% हिस्सा सिंचित है। धान-गेहूं चक्र पंजाब की कुल कृषि भूमि के 75% से अधिक हिस्से का उपयोग करता है, जिसके लिए अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसी कारण पंजाब गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, क्योंकि 80% से अधिक भूजल ब्लॉक ‘डार्क ज़ोन’ की श्रेणी में आ गए हैं।

पंजाब में मोटे अनाज की खेती और फ़सलों में विविधता लाने के संबंध में सांसद सतनाम संधू के सवाल का जवाब देते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन को बताया कि कृषि और किसान कल्याण विभाग फ़सलों में विविधता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ लागू कर रहा है। इनमें ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन’ (NFSNM) भी शामिल है, जिसके तहत 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पंजाब के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि NFSM के तहत, वर्ष 2025-26 के लिए पंजाब राज्य में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने हेतु 34.60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

कृषि मंत्री ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत फसल विविधीकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सरकार ने 2025-26 के लिए पंजाब के किसानों को पारंपरिक फसलों की खेती से हटाकर बाजरा, दालें, तिलहन और अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर मोड़ने के लिए 103.75 करोड़ रुपये की राशि मंज़ूर की है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि 2025-26 में NFSNM योजना के तहत कुल 140 क्विंटल बाजरे के बीज वितरित किए गए हैं।

केंद्र सरकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को भी प्रोत्साहन दे रही है, जिसके लिए पिछले पाँच वर्षों में 800 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। पूरे भारत में 29 आवेदकों को 793 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है, जिसमें पंजाब के कपूरथला, पटियाला और जालंधर ज़िलों के तीन प्रोजेक्ट शामिल हैं।

मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) के तहत 4612 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को मंज़ूरी दी है, जिनमें से पंजाब में बाजरे से जुड़े पाँच सूक्ष्म खाद्य उद्यमों को मंज़ूरी मिली है।

देश में मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के प्रयासों पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “केंद्र सरकार धान-गेहूं के फसल चक्र के विकल्प के तौर पर मोटे अनाज को बढ़ावा देने में सफल रही है। यह फसल चक्र पंजाब समेत कई राज्यों में अपनाया जा रहा था। भारत में मोटे अनाज का उत्पादन 2021-22 के लगभग 160 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 185.92 लाख टन हो गया है, और इसकी खेती का क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा,“हाल के दशकों में, पानी और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हुई है। पंजाब में पानी की ज़्यादा खपत वाली गेहूं-धान की खेती की तरफ़ झुकाव देखा गया है, जिससे पानी की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और मिट्टी की सेहत में गिरावट आई है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बाजरा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

इनमें ‘श्री अन्न’ (बाजरा) जैसी पहल शुरू करना और 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित करना शामिल है। बाजरा उत्पादन बढ़ाने, फ़सलों में विविधता लाने और दालों व तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप, ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा (मिल्लेट्स) वर्ष 2023’ को 100 से ज़्यादा देशों और भारत के सभी राज्यों की भागीदारी के साथ मनाया गया। ज़्यादा से ज़्यादा लोग अपने खान-पान में बाजरा को शामिल गति मिलेगी, और ‘श्री अन्न’ का उत्पादन और खपत, दोनों लगातार बढ़ते रहेंगे।”

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