मुंबई, 06 नवंबर 2025: भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने नई बॉम्बे हाई कोर्ट इमारत पर सख्त बात कही है। उन्होंने कहा कि यह फिजूलखर्ची से दूर रहे। बुधवार को बांद्रा पूर्व में इसकी नींव रखी गई। CJI ने कहा, इमारत साम्राज्यवादी स्टाइल की न बने। यह संविधान के लोकतांत्रिक मूल्यों से मेल खाए।
CJI ने सलाह दी कि फिजूलखर्ची से बचें। उन्होंने याद दिलाया कि जज अब जमींदार नहीं रहे। पूरे प्रोजेक्ट पर 4000 करोड़ से ज्यादा खर्च होगा।
CJI ने कहा, कुछ अखबारों में पढ़ा कि इमारत फिजूलखर्ची वाली है। दो जज एक लिफ्ट शेयर करेंगे। हाई कोर्ट के जज हों या ट्रायल कोर्ट के? सुप्रीम कोर्ट के हों या अन्य? सभी न्यायपालिका के हैं। कार्यपालिका और विधायिका भी। संविधान के तहत सब देश के आखिरी नागरिक की सेवा करते हैं। समाज को इंसाफ देते हैं।
CJI ने इमारत की भव्यता पर जोर दिया। इसे आइकॉनिक बनाएं। लेकिन कोर्ट प्लानिंग में जजों की जरूरतें देखें। नागरिकों और मुकदमेबाजों की जरूरतें न भूलें। यह न्याय का मंदिर बने। सात सितारा होटल न बने।
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