चंडीगढ़, 29 जुलाई 2025: केरल की नर्स निमिषा प्रिया की यमन में फांसी की सजा को लेकर हालिया घटनाक्रम ने काफी ध्यान खींचा है। निमिषा को 2017 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी सजा को 16 जुलाई 2025 को होने वाली फांसी से ठीक एक दिन पहले टाल दिया गया, जिससे उनके परिवार और समर्थकों को अस्थायी राहत मिली।
हालांकि, भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के कार्यालय ने 28 जुलाई 2025 को दावा किया कि सना में एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद निमिषा की मौत की सजा को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। इस दावे को इवेंजलिस्ट डॉ. के.ए. पॉल ने भी दोहराया, जिन्होंने कहा कि निमिषा को जल्द रिहा कर भारत लाया जाएगा। लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि निमिषा की सजा रद्द नहीं हुई है और इस तरह की खबरें गलत हैं।
क्या है निमिषा प्रिया का पूरा मामला?
निमिषा पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोड की रहने वाली हैं। 2008 में बेहतर रोजगार के लिए यमन गई थीं। 2015 में उन्होंने सना में तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू किया था, क्योंकि यमनी कानून के तहत विदेशी नागरिक अकेले व्यवसाय नहीं चला सकते। निमिषा के अनुसार, तलाल ने उनके पासपोर्ट पर कब्जा कर लिया, उनकी आय हड़प ली और उनका शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया। 2017 में, अपने पासपोर्ट को वापस लेने के लिए निमिषा ने तलाल को नशीला पदार्थ दिया, जिसके अधिक मात्रा में होने से उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद निमिषा ने सबूत मिटाने के लिए उनके शव को टुकड़ों में काटकर पानी की टंकी में फेंक दिया।
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