चंडीगढ़, 11 जुलाई 2025: पंजाब विधानसभा में 11 जुलाई 2025 को वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे पंजाब की स्वायत्तता और जल अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। चीमा ने केंद्र और पूर्ववर्ती राज्य सरकारों पर पंजाब के जल अधिकारों के साथ “ऐतिहासिक अन्याय” करने का आरोप लगाया।
चीमा ने 1954 के उत्तर प्रदेश-पंजाब समझौते का हवाला देते हुए कहा कि इसमें यमुना नदी का दो-तिहाई हिस्सा पंजाब को आवंटित था। हालांकि, 1966 में पंजाबी सूबा के गठन के दौरान इस समझौते की अनदेखी की गई, जिसे उन्होंने कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी की “मिलीभगत” बताया।
उन्होंने 1981 के जल बंटवारे समझौते की भी आलोचना की, जिसमें रावी और ब्यास नदियों का बड़ा हिस्सा हरियाणा और राजस्थान को दे दिया गया, जबकि भौगोलिक रूप से ये नदियां इन राज्यों से होकर नहीं बहतीं। हरपाल सिंह चीमा ने सवाल उठाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दरबारा सिंह ने इस समझौते को क्यों स्वीकार किया, जिसने पंजाब को मात्र 4.22 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी तक सीमित कर दिया, जबकि कुल उपलब्ध 17.17 MAF में से राजस्थान को 8.60 MAF और हरियाणा को 3.50 MAF आवंटित किया गया।
सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद पर हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह मुद्दा दशकों से पंजाब के लिए भावनात्मक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। उन्होंने बताया कि SYL नहर को लेकर पंजाब के युवाओं ने लंबा संघर्ष किया, जिसमें कई बलिदान भी हुए, लेकिन इसका समाधान आज तक नहीं हुआ।
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