चंडीगढ़, 2 अप्रैल 2025: हरियाणा राजभवन में मंगलवार को ओडिशा दिवस का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। 1 अप्रैल, 1936 को ओडिशा एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था, और इसी मौके को याद करने के लिए यह कार्यक्रम रखा गया। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने इस समारोह की मेजबानी की और ओडिशा के लोगों के योगदान को दिल से सराहा। उन्होंने कहा कि ओडिशा ने न सिर्फ हरियाणा, बल्कि पूरे देश के विकास में अहम भूमिका निभाई है।
ओडिशा की समृद्ध विरासत पर जोर
हरियाणा राजभवन में राज्यपाल ने अपने संबोधन में ओडिशा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “ओडिशा प्राचीन मंदिरों, गहरी परंपराओं और अनूठी कला का खजाना है। यह राज्य भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक प्रगति में भी बड़ा भागीदार रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा के मेहनती और कुशल लोग हरियाणा के विकास में कई क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।
“विविधता में एकता हमारी ताकत”
राज्यपाल ने अपने भाषण में भारत की ‘विविधता में एकता’ की भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ओडिशा की सांस्कृतिक समृद्धि हमारे देश के बहुलवादी मूल्यों को और मजबूत करती है। हरियाणा में रहते हुए ओडिया समुदाय ने अपनी परंपराओं को न सिर्फ संजोया, बल्कि इसे आगे बढ़ाया भी है। यहाँ के प्रगतिशील माहौल में वे सहजता से घुलमिल गए हैं, जो एक मिसाल है।”
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