Chhatrapati Shivaji Maharaj: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 395वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

by Manu
Chhatrapati Shivaji Maharaj

नई दिल्ली , 19 फ़रवरी 2025: Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2025: आज, 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर पर लिखा, “शिवाजी महाराज का पराक्रम और दूरदर्शी नेतृत्व हमेशा प्रेरणा देने वाला रहेगा। उन्होंने स्वराज्य की नींव रखी और भारतीय समाज को स्वतंत्रता की दिशा में अग्रसर किया।”

राजस्थान में श्रद्धांजलि अर्पित की गई

इस खास दिन पर, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने जयपुर के राजभवन में छत्रपति शिवाजी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित की। यह अवसर सम्मान और श्रद्धा का था, जहां राज्य के प्रमुखों ने महान मराठा योद्धा को श्रद्धांजलि दी।

Chhatrapati Shivaji Maharaj: केंद्रीय नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें नमन किया। राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, “शिवाजी महाराज का अद्वितीय साहस, न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और लोगों के कल्याण के लिए अडिग समर्पण हमें हमेशा प्रेरित करेगा। उनका संघर्ष और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस अवसर पर ट्वीट करते हुए कहा, “शिवाजी महाराज का जीवन नीति, कर्तव्य और धर्म परायणता का प्रतीक था। उन्होंने ‘हिंदवी स्वराज्य’ का उद्घोष किया और देश को स्वाधीनता की दिशा में एक मजबूत रास्ता दिखाया। उनके संघर्ष और नेतृत्व के कारण, वे राष्ट्र निर्माण के महान प्रतीक बने।”

Chhatrapati Shivaji Maharaj: नागपुर में धूमधाम से मनाई गई जयंती

महाराष्ट्र के नागपुर में शिवाजी महाराज की जयंती को धूमधाम से मनाया गया। लोग ढोल, नगाड़े और झंडों के साथ सड़कों पर उतरे और महान योद्धा की विरासत का जश्न मनाया। यह दृश्य उन लोगों की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक था जिन्होंने शिवाजी महाराज की बहादुरी और नेतृत्व को याद किया।

Chhatrapati Shivaji Maharaj: शिवाजी महाराज का जीवन और कार्य

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को पुणे के शिवनेरी किले में हुआ था। उनका बचपन संघर्षों और वीरता की कहानियों से भरा हुआ था, और उन्होंने भारतीय इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा।

मराठा साम्राज्य की स्थापना

शिवाजी महाराज ने 1670 में मुगलों के खिलाफ भीषण युद्ध लड़ा और 1674 में पश्चिमी भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। उनकी सैन्य रणनीति और युद्ध कौशल ने उन्हें एक महान योद्धा के रूप में स्थापित किया।

प्रशासनिक सुधार और नागरिक संहिता

शिवाजी महाराज ने केवल सैन्य जीतें ही नहीं, बल्कि उन्होंने एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्था भी बनाई। उन्होंने स्थानीय लोगों के लिए एक व्यापक नागरिक संहिता की स्थापना की, जो उनके शासन के न्यायपूर्ण और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज का योगदान न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण था, बल्कि उन्होंने समाज और प्रशासनिक सुधारों के जरिए देश की जड़ों को भी मजबूत किया। उनका जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है और उनकी शौर्य गाथाएं हमारे इतिहास का अभिन्न हिस्सा बन गई हैं। उनके द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य ने भारत के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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