ममता कुलकर्णी और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी किन्नर अखाड़े से निष्कासि हुए

by Manu
Mamta Kulkarni

उज्जैन, 31 जनवरी 2025:  किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) और आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को अखाड़े से निष्कासित कर दिया है। यह कदम बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) की महामंडलेश्वर के पद पर नियुक्ति के बाद उठाया गया, जो विवादों के केंद्र में रही है। त्रिपाठी ने कथित रूप से संस्थापक की अनुमति के बिना ममता को यह पद सौंपा, जिससे समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया।

ऋषि अजय दास ने कहा

30 जनवरी, 2025 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में ऋषि अजय दास ने कहा कि “किन्नर अखाड़े के संस्थापक के रूप में, मैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर रहा हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि त्रिपाठी की नियुक्ति का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान के लिए था, लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को निभाने से इंकार कर दिया। यह विवाद 2019 में जूना अखाड़े के साथ हुए एक समझौते को लेकर पैदा हुआ, जिसे अजय दास ने बिना अपनी सहमति के किए जाने का आरोप लगाया। दास का कहना है कि इस समझौते के परिणामस्वरूप दोनों अखाड़ों के बीच अनुबंध कानूनी रूप से अवैध है।

इसके अलावा, अजय दास ने त्रिपाठी पर ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) को महामंडलेश्वर की उपाधि देने का आरोप लगाया, जिनका आपराधिक इतिहास विवादास्पद रहा है। उन्होंने इसे अखाड़े के सिद्धांतों और धर्मिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कदम अनैतिक था। दास ने कहा, “ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने से सनातन धर्म को नुकसान हुआ है।”

दोनों के निष्कासन से दो पक्ष मे आध्यात्मिक समुदाय

इन दोनों के निष्कासन के बाद आध्यात्मिक समुदाय में हंगामा मच गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने त्रिपाठी और कुलकर्णी के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने अजय दास के फैसले की वैधता को चुनौती दी और कहा कि त्रिपाठी और कुलकर्णी दोनों की भूमिकाएं अखाड़े में जारी रहेंगी और वे आगामी अमृत स्नान में भाग लेंगे।

ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) की महामंडलेश्वर के रूप में नियुक्ति पर विवाद तब शुरू हुआ जब आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने महाकुंभ के दौरान सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी। 1990 के दशक में बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाली ममता कुलकर्णी ने 2000 के दशक की शुरुआत में लाइमलाइट से दूरी बना ली थी, लेकिन कुछ समय बाद वह भारत लौट आईं और त्रिपाठी ने उन्हें महामंडलेश्वर का पद सौंपा, जो अब विवादों में घिर चुका है।

इस मामले पर पहले भी ट्रांसजेंडर कथावाचक जगतगुरु हिमांगी सखी मां ने चिंता जताई थी और ममता की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कुलकर्णी के अतीत को आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा था, जिससे विवाद और गहरा गया था।

यह घटनाक्रम किन्नर अखाड़े में आंतरिक राजनीति और धार्मिक मूल्यों के बीच टकराव को उजागर करता है, जो धार्मिक समुदायों और समाज में महत्वपूर्ण चर्चा का कारण बन गया है।

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