Myanmar Earthquake: म्यांमार में भूकंप से 2,719 की मौत, लगातार बढ़ रहा आंकड़ा

by Manu
म्यांमार में भूकंप से 2,719 की मौत

Myanmar Earthquake Updates: म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप ने तबाही मचा दी है। इसके बाद 6.4 तीव्रता का एक और झटका लगा, जिसने हालात को और बिगाड़ दिया। भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले और सेगाइंग शहरों की सीमा पर था, जो जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे था। म्यांमार के अलावा इसके झटके पड़ोसी देशों में भी महसूस किए गए। थाईलैंड के चियांग मई शहर में भी कई इमारतें ढह गईं और भारी नुकसान हुआ।

मृतकों की संख्या बढ़ी, हालात भयावह

म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने राजधानी नेपीडॉ से जानकारी दी कि अब तक 2,719 लोगों की मौत हो चुकी है। 4,521 लोग घायल हैं और 441 लापता बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में बचाव टीमें अभी तक नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रभावित इलाकों में बचाव का काम जोरों पर है। राहतकर्मियों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी अपने परिजनों को ढूंढने के लिए मलबे में हाथ-पैर मार रहे हैं। भीषण गर्मी की वजह से शवों से बदबू फैलने लगी है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। करीब 35 लाख लोग बेघर हो गए हैं। अस्पतालों में जगह की कमी के चलते सड़कों पर ही घायलों का इलाज चल रहा है।

जमीनी हालात: मलबे में जिंदगी की तलाश

भूकंप ने मांडले जैसे बड़े शहरों को खंडहर में बदल दिया। सैकड़ों इमारतें जमींदोज हो गईं और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप पड़ गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मलबे में अभी भी कई लोग दबे हो सकते हैं। बचावकर्मी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन भारी मशीनों और संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती है। एक स्थानीय शख्स ने बताया, “हर तरफ सिर्फ मलबा और चीखें हैं। हमें नहीं पता कि हमारे अपने कहां हैं।” गर्मी और खराब हालात ने हालात को और मुश्किल बना दिया है।

भारत का ऑपरेशन ब्रह्मा: मदद का पहला कदम

म्यांमार की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया। ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत भारत ने राहत सामग्री और सहायता दल को तुरंत रवाना किया। 29 मार्च को दो नौसैनिक जहाज, INS सतपुरा और INS सावित्री, 40 टन राहत सामग्री लेकर यांगून के लिए रवाना हुए। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के C-17 विमानों से 60 टन सामान और 118 चिकित्साकर्मियों का एक दल मांडले पहुंचा। यह टीम वहां एक अस्थायी फील्ड अस्पताल बनाएगी, जहां घायलों का इलाज शुरू होगा। भारत ने टेंट, कंबल, दवाइयां, खाना और सोलर लैंप जैसी जरूरी चीजें भेजी हैं, ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत राहत मिल सके।

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