चंडीगढ़, 05 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने प्रसूति स्वास्थ्य देखभाल को सफलतापूर्वक विकेंद्रित कर दिया है। आम आदमी क्लीनिक (ए.ए.सी.) अब गर्भवती महिलाओं के लिए नई जीवन रेखा के रूप में उभर रहे हैं। विशेष प्रोटोकॉल-आधारित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू करने के मात्र चार महीनों के अंदर सेवाएं हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। हर महीने लगभग 20,000 गर्भवती महिलाएं इन क्लीनिकों में पहुंच रही हैं।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस पहल की सफलता साझा करते हुए बताया कि कार्यक्रम के तहत एक यूनिक रैफरल सिस्टम के माध्यम से 10,000 से अधिक महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान की गई हैं। राज्य सरकार ने लगभग 500 निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को सूचीबद्ध करके यह सुनिश्चित किया है कि महिलाओं को विभिन्न स्कैन (जिनकी सामान्य कीमत 800 से 2,000 रुपये के बीच होती है) पूरी तरह मुफ्त मिल रही हैं। इस सुविधा से मात्र 120 दिनों के छोटे समय में पंजाबी परिवारों को अनुमानित 1 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 70 प्रतिशत से कम गर्भवती महिलाओं ने अपना पहला एंटे-नेटल चेक-अप करवाया है। लगभग 60 प्रतिशत से कम महिलाओं ने सिफारिश अनुसार पूरे चार चेक-अप पूरे किए हैं। राज्य में माताओं की मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 90 है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
पंजाब में हर साल लगभग 4.3 लाख प्रसव होते हैं। ऐसे में माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए जल्दी पता लगाना, नियमित निगरानी और समय पर रैफरल बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले तीन सालों में मान सरकार ने 881 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए हैं, जो पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की रीढ़ बन चुके हैं। इन क्लीनिकों में 4.6 करोड़ से अधिक ओपीडी विजिट हो चुकी हैं और रोजाना लगभग 70,000 मरीजों का इलाज हो रहा है।
ये भी देखे: ऑपरेशन सिंदूर: पंजाब में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जारी किया हाई अलर्ट